देश के कई शीर्ष इंजीनियरिंग और मेडिकल संस्थानों में नक्सलियों के बच्चे भी पढ़ रहे हैं. सूत्रों के हवाले से ऐसी ख़बर आई है. बताया जाता है कि केंद्रीय गृह मंत्रालय ने ऐसे कई नक्सलियों की पहचान की है जिन्होंने अपने बच्चों को शीर्ष इंजीनियरिंग तथा मेडिकल संस्थानों में प्रवेश दिलाने के लिए लाखों रुपए ख़र्च किए. उन्होंने सिर्फ़ अपने ही नहीं बल्कि रिश्तेदारों के बच्चों को भी इन संस्थानों में दाख़िला दिलवाया. साथ ही यह भी सुनिश्चित किया कि उनका परिवार पूरे आराम से रहे.

द इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक गृह मंत्रालय के सूत्रों ने इसकी पुष्टि की है. उन्होंने इसके कुछ उदाहरण भी गिनाए हैं. मसलन- भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवदी) की बिहार-झारखंड स्पेशल एरिया कमेटी के सदस्य प्रद्युम्न शर्मा ने एक निजी मेडिकल कॉलेज में अपनी भतीजी को दाख़िला दिलाने के लिए 2017 में 22 लाख रुपए अदा किए. इसी तरह झारखंड के नक्सली नेता अरविंद यादव ने अपने भाई को एक निजी इंजीनियरिंग कॉलेज में प्रवेश दिलाने के लिए 12 लाख रुपए दिए. यही नहीं नवंबर 2016 में जब नोटबंदी का फ़ैसला हुआ तब बिहार-झारखंड में सक्रिय नक्सली नेता संदीप यादव ने 15 लाख रुपए की कीमत के पुराने नोट बदले भी थे.

सूत्रों की मानें तो ये चंद उदाहरण ही हैं. ऐसे कई मामले मंत्रालय की निग़ाह में आए हैं. इनकी जांच के लिए एक समिति भी बना दी गई है. इनमें तमाम कर विभागों तथा जांच एवं ख़ुफ़िया एजेंसियों के सदस्य शामिल हैं. यह समिति अब पता लगाएगी कि माओवादियों के पास यह पैसा कहां से आया. इसके बाद उनकी इस काली आमदनी के स्रोत को ध्वस्त किया जाएगा. इसके साथ गृह मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी यह भी कहते हैं, ‘इस ख़ुलासे से नक्सलियों का दोहरा चरित्र भी उजागर हो गया है. एक तरफ़ तो वे विचारधारा के नाम पर जंगल-जंगल छिपते-छिपाते हिंसा में संलग्न हैं दूसरी तरफ़ यह भी सुनिश्चित कर रहे हैं कि उनके परिवार को काई तक़लीफ़ न हो.’