सुप्रीम कोर्ट ने ताजमहल की सही से देखभाल करने में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) को नाकाम बताया है और उसकी जमकर खिंचाई की है. खबरों के मुताबिक बुधवार को शीर्ष अदालत ने पूछा कि 17वीं सदी की यह इमारत कीड़ों से ग्रस्त है, उसे रोकने के लिए एएसआई ने क्या कदम उठाए हैं? इस पर एएसआई के अधिवक्ता ने कहा कि कीड़ों की इस समस्या की वजह यमुना का ठहरा हुआ पानी है. इस पर जस्टिस मदन बी लोकुर और जस्टिस दीपक गुप्ता की बेंच ने कहा, ‘अगर एएसआई ने अपना काम किया होता तो यह हालात ही न पैदा होते. एएसआई खुद को जिस तरह से बचा रही है, उस पर हमें हैरानी होती है. आप (केंद्र) विचार करें कि एएसआई की वहां पर जरूरत भी है या नहीं.’

वहीं, केंद्र सरकार की तरफ से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एएनएस नंदकर्णी ने कहा कि पर्यावरण और वन मंत्रालय ताजमहल के नुकसान का आकलन और उसे दुरुस्त करने के लिए अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों की नियुक्त करने के बारे में अदालत के सुझाव पर विचार कर रहा है. सुप्रीम कोर्ट ने एक मई को इस मामले की सुनवाई के दौरान यह सुझाव दिया था.

सुप्रीम कोर्ट ताजमहल की देखभाल को लेकर केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार की भी खिंचाई कर चुका है. फरवरी में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से पूछा था कि ताजमहल का रंग पीले-हरा क्यों होता जा रहा है? वहीं, उत्तर प्रदेश सरकार से दुनिया के अजूबों में शामिल ताजमहल के रखरखाव का ब्यौरा मांगा था.