आखिर वॉलमार्ट द्वारा फ्लिपकार्ट की खरीद की चर्चाओं पर औपचारिक मुहर लग गई है. अमेरिका की दिग्गज रिटेल कंपनी वॉलमार्ट के अध्यक्ष और सीईओ डग मैकमिलन ने बुधवार को इसका औपचारिक और निर्णायक ऐलान कर दिया. उन्होंने बताया कि उनकी कंपनी 16 अरब डॉलर में फ्लिपकार्ट की 77 फीसदी हिस्सेदारी खरीदेगी. यह भारत के ई-कॉमर्स सेक्टर में हुआ अब तक का सबसे बड़ा सौदा है. वहीं ताजा सौदे के बाद फ्लिपकार्ट की कीमत पहले के 12 अरब डॉलर से 70 फीसदी ज्यादा 20.8 अरब डॉलर (1.40 लाख करोड़ रुपये) आंकी गई है.

इस समझौते की खास बात यह है कि फ्लिपकार्ट को अब निजी से सार्वजनिक कंपनी में बदलने का निर्णय लिया गया है. इसके अलावा यह भी बताया गया कि वॉलमार्ट की योजना भविष्य में फ्लिपकार्ट पर अपना नियंत्रण कायम रखते हुए इसमें अपनी हिस्सेदारी घटाने की है. बुधवार को इस बारे में दोनों कंपनियों ने कहा कि इसके लिए कई निवेशकों से बात की जा रही है. हालांकि ऐसे निवेशकों के नाम नहीं बताए गए लेकिन माना जा रहा है कि वॉलमार्ट की 15 फीसदी हिस्सेदारी उसके तकनीकी साझेदार गूगल (अल्फाबेट) के पास जा सकती है.

वैसे समझौते के बाद यह जानकारी भी दी गई है कि वॉलमार्ट के 16 अरब डॉलर के ताजा निवेश में से दो अरब डॉलर (करीब 13 हजार करोड़ रुपये) का इस्तेमाल फ्लिपकार्ट की पूंजी जरूरतों को पूरा करने में किया जाएगा. वहीं बाकी के 14 अरब डॉलर को मौजूदा निवेशकों से हिस्सेदारी खरीदने में खर्च किया जाएगा.

कंपनी से पूरी तरह बाहर होने वाले इन निवेशकों में जापान की निवेश फर्म सॉफ्टबैंक, नैस्पर्स, आईडीजी और सह-संस्थापक सचिन बंसल (5.96 फीसदी) प्रमुख हैं. बंसल को कंपनी के ताजा मूल्यांकन को देखते हुए 1.23 अरब डॉलर (करीब 8,200 करोड़ रुपये) मिलने का अनुमान है. हालांकि फ्लिपकार्ट के दूसरे सह-संस्थापक और पूर्व सीईओ बिन्नी बंसल अपने करीब पांच फीसदी हिस्सेदारी के साथ कंपनी में बने रहेंगे.

इससे पहले कंपनी में करीब 20 फीसदी की हिस्सेदारी रखने वाली सॉफ्टबैंक के संस्थापक और मुखिया मसायोशी सोन ने भी बुधवार को इसकी पुष्टि की थी. उन्होंने कहा कि यह सौदा मंगलवार की रात को पक्का हुआ. जापान की सबसे बड़ी टेलिकॉम और इंटरनेट कंपनियों में से एक सॉफ्टबैंक फ्लिपकार्ट में अभी तक सबसे बड़ी निवेशक है.

फ्लिपकार्ट को सचिन और बिन्नी बंसल ने 2007 में शुरू किया था. शुरुआत में कंपनी किताबें ऑनलाइन बेचती थी. लेकिन धीरे-धीरे ये खरीददारों के लिए कपड़ों से लेकर मोबाइल फोन तक करीब 80 लाख प्रोडक्ट्स का ठिकाना बन गई. बताया जाता है कि आज इस पर करीब 10 करोड़ यूजर रजिस्टर्ड हैं.

फ्लिपकार्ट के वॉलमार्ट के हो जाने का मतलब यह भी है कि भारत अब दुनिया के तीन बड़े रीटेलरों के बीच जंग का मैदान हो गया है. ये हैं वॉलमार्ट, एमेजॉन और अलीबाबा. हालांकि पिछले दो-तीन सालों से फ्लिपकार्ट को एमेजॉन से कड़ी टक्कर मिल रही है. देश के ई-कॉमर्स बाजार पर अपना दबदबा बनाने के लिए एमेजॉन 5.5 अरब डॉलर (36,000 करोड़ रुपये) का निवेश करने जा रही है. इसमें से 1.6 अरब डॉलर तो उसने साल भर में ही निवेश कर दिया है. जानकारों के अनुसार एमेजॉन की इस आक्रामक नीति का मुकाबला करने के लिए ही फ्लिपकार्ट ने वॉलमार्ट की शरण ली है.