रबीन्द्रनाथ टैगोर की कहानी काबुलीवाला हममें से ज्यादातर ने कभी न कभी पढ़ी होगी. जिन्होंने नहीं पढ़ी होगी, उन्होंने इसे सुना होगा या फिर इससे मिलती-जुलती किसी कहानी को पढ़ा या सुना होगा. हो सकता है कुछ लोगों ने इसे टीवी पर देखा हो. कुल मिलाकर, काबुलीवाला एक ऐसी कहानी है जिससे लगभग हर भारतीय परिचित है. बाइस्कोपवाला इसी कहानी पर आधारित एक फिल्म है जिसमें मेवा बेचने वाले को बाइस्कोप दिखाने वाले से रिप्लेस किया गया है. इसके बाद फिल्म एक अफगान फेरी वाले और एक छोटी सी बच्ची की दोस्ती का किस्सा ही कहती है. लेकिन यह किस्सा उतना सीधा-साधा नहीं है जितना काबुलीवाला में था. इसमें काफी कुछ इतना नया है कि जानी-पहचानी सी कहानी वाली यह फिल्म परदे पर पूरी तरह से अनजान लग सकती है.

बाइस्कोपवाला का ट्रेलर देखकर पता चलता है कि कहानी को नए वक्त में स्थापित करने के लिए किए गए कुछ जरूरी बदलावों और इसे सस्पेंस थ्रिलर बनाने की कोशिशों के चलते यह शायद थोड़ी पेंचदार हो गई है. इसका एक मतलब यह भी है कि काबुलीवाला के उलट बाइस्कोपवाला किसी बच्ची और फेरीवाले की बच्चों के लिए कही गई कहानी नहीं है.

ट्रेलर में दृश्य जिस सीक्वेंस में रखे गए हैं, उन्हें देखने पर फिल्म की कोई साफ तस्वीर नहीं बन पाती. फिर भी कहानी का अगर मोटा-मोटा अंदाजा लगाया जाए तो यह बताता है कि कहानी की नायिका, मिनी के पिता अचानक अफगानिस्तान की यात्रा पर जाते हैं और दुर्भाग्य से उनकी फ्लाइट क्रैश हो जाती है. इसके बाद मिनी इस बात का पता लगाने अफगानिस्तान जाती है कि उसके पिता वहां क्यों जाना चाहते थे? वहां जाकर शायद उसे पता चलता है कि उनकी इस पूरी न हो सकी यात्रा के तार उसके बचपन से जुड़े हैं. मिनी के इस बचपन से बाइस्कोपवाले की कहानी जुड़ी है और जो शायद किसी तरह से उसके आज को भी प्रभावित कर रही है. इस तरह यह ट्रेलर बताता है कि फिल्म बाइस्कोपवाले से मिनी की दोस्ती, उससे दुबारा मिलने के घटनाक्रम के साथ-साथ बाप-बेटी के बीच का किस्सा भी बताने वाली है.

बाइस्कोपवाला की कहानी भले ही उलझी-उलझी सी लग रही हो, लेकिन फिल्म में अभिनय एकदम सधा हुआ दिखने वाला है. यह बात दावे के साथ कह देने की वजह फिल्म की स्टार कॉस्ट है जिसमें डैनी डेन्जोंगपा, आदिल हुसैन, बृजेंद्र काला, टिस्का चोपड़ा और गीतांजलि थापा जैसे नाम शामिल हैं. आजकल कभी-कभार ही परदे पर नजर आने वाले डैनी, ‘बेबी’ और ‘नाम शबाना’ के करीब दो साल बाद बाइस्कोपवाला बनकर दिखाई देने वाले हैं. फिल्म में अपने किरदार की उम्र के अलग-अलग पड़ावों को वे कितने विश्वसनीय ढंग से दिखाने वाले हैं, इस बात का पता भी फिल्म की ट्रेलर दे देता है.

डैनी के अलावा फिल्म का दूसरा मुख्य किरदार गीतांजलि थापा ने निभाया है. गीतांजलि अपने अभिनय के लिए एक राष्ट्रीय और कई अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार अपने नाम कर चुकी हैं. बावजूद इसके वे अब तक सिनेमा उद्योग के लिए पहचाना हुआ चेहरा नहीं बन पाई है. पिछले दिनों गीतांजलि, राजकुमार राव की बेहद सराही गई फिल्म ‘ट्रैप्ड’ में नूरी बनकर सिर्फ दो दृश्यों में नजर आई थीं और फिलहाल वे अपने उसी किरदार से पहचानी जाती हैं. ट्रेलर में बंगाली बाला बनकर थापा इस बात का भरोसा देती सी नजर आ रही हैं कि उनके लिए भी यह फिल्म देखी जा सकती है.

बाइस्कोपवाला के लेखक और निर्देशक देब मेढेकर एफटीआईआई से पासआउट हैं और दस साल तक विज्ञापन फिल्में बनाने का अनुभव रखते हैं. इस फिल्म से वे बतौर निर्देशक बॉलीवुड में कदम रखने जा रहे हैं. फिलहाल, उनकी पहली फिल्म का यह ट्रेलर आपको चौंकाने के साथ-साथ खुश तो करता है लेकिन फिर कुछ सवाल छोड़कर कन्फ्यूज भी कर देता है. यह आपको 25 मई को फिल्म की रिलीज के बाद ही पता लगेगा कि इन्हें आपकी उत्सुकता बढ़ाने के लिए ट्रेलर में छोड़ा गया था या फिर ट्रेलर सिर्फ फिल्म का ही नहीं इसके कन्फ्यूजन का भी प्रतिनिधित्व कर रहा था.

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