त्रिपुरा के मुख्यमंत्री बिप्लब कुमार देब का एक और बयान चर्चा का विषय बन गया है. उनका यह बयान रबींद्रनाथ टैगोर पर आया है. हिंदुस्तान टाइम्स के मुताबिक बुधवार को उदयपुर में आयोजित राजर्षि उत्सव के उद्घाटन के दौरान बिप्लब देब ने कहा, ‘एक विश्व प्रसिद्ध कवि होने के अलावा रबींद्रनाथ टैगोर एक ऐसे व्यक्ति के रूप में भी जाने जाते हैं जिन्होंने ब्रिटिश सरकार के विरोध में नोबेल पुरस्कार को अस्वीकार कर दिया था.’

बिप्लब के इस बयान पर विपक्ष की तुरंत प्रतिक्रिया आई. उसने बिना तैयारी किए भाषण देने के लिए मुख्यमंत्री की आलोचना की. सीपीआईएम की केंद्रीय समिति के सदस्य गौतम दास ने कहा, ‘हमारे मुख्यमंत्री ने मूर्खता की सीमा पार कर दी है. हमें तो इस पर टिप्पणी करना भी उचित नहीं लगता.’ उधर, कांग्रेस ने बिप्लब कुमार देब के बयान को दुर्भाग्यपूर्ण बताया. त्रिपुरा में कांग्रेस के उपाध्यक्ष तपस डे ने कहा, ‘यह हमारी प्रार्थना है कि वे जिन विषयों पर बोलना चाहें उनका अच्छे से अध्ययन करें. एक मुख्यमंत्री से यह उम्मीद नहीं की जाती कि वह नाइटहुड और नोबेल पुरस्कार में उलझे.’

दरअसल, रबींद्रनाथ टैगोर ने नोबेल नहीं बल्कि ब्रिटिश सरकार द्वारा दी गई नाइटहुड या सर की उपाधि लौटाई थी. जलियांवाला बाग नरसंहार के बाद ब्रिटिश सरकार के विरोध में उन्होंने यह कदम उठाया था. नोबेल पुरस्कार उन्हें 1913 में दिया गया था जिसे उन्होंने जीवन के अंतिम समय तक अपने साथ रखा. बिप्लब कुमार देब ने इस बार तथ्यात्मक रूप से गलतबयानी की है.

त्रिपुरा के मुख्यमंत्री अपने बयानों को लेकर कुछ समय से लगातार विवादों में रहे हैं. उनका अजीबोगरीब बयान देना नहीं रुका तो खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को उन्हें दिल्ली तलब करना पड़ा था. लेकिन लगता है कि इसका भी उन पर असर नहीं पड़ा है.