रमज़ान के महीने और जल्द ही शुरू हो रही बाबा अमरनाथ यात्रा के मद्देनज़र जम्मू-कश्मीर की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ़्ती ने सुझाव दिया था कि केंद्र सरकार को राज्य में एकतरफा संघर्ष विराम लागू करने पर विचार करना चाहिए. लेकिन प्रदेश में महबूबा के साथ सत्ता की साझेदार और केंद्र में सरकार चला रही भारतीय जनता पार्टी ने इस सुझाव को ठुकरा दिया है.

भाजपा की जम्मू-कश्मीर इकाई के प्रवक्ता सुनील सेठी ने इस बाबत मीडिया से बातचीत में कहा, ‘हमारा पूरी दृढ़ता से ये मानना है कि मौज़ूदा हालात में एकतरफा संघर्षविराम देशहित में नहीं होगा.’ उन्होंने उस सर्वदलीय बैठक का भी ज़िक्र किया जिसमें कथित तौर पर संघर्षविराम संबंधी सुझाव आया था और जिसे बाद में मुख्यमंत्री ने सार्वजनिक किया. सेठी ने कहा, ‘सर्वदलीय बैठक में निर्दलीय विधायक इंजीनियर राशिद ने यह सुझाव दिया था. लेकिन इस पर बैठक में कोई चर्चा नहीं हुई और भाजपा ने अपनी सहमति भी नहीं दी थी.’

उन्होंने कहा, ‘हमारी राय एकदम साफ है कि भारतीय सेना ने आतंकियों पर जो दबाव बनाया हुआ है कि वह जारी रहना चाहिए. इस वक़्त तक अधिकांश सूचीबद्ध आतंकियों का ख़ात्मा हो चुका है. कुछ ही सक्रिय हैं. ज़ल्द ही वे भी ख़त्म कर दिए जाएंगे. अभी वे दबाव में हैं. छिपते फिर रहे हैं. लेकिन एकतरफा संघर्ष विराम लागू किया गया तो उन्हें इस दबाव से मुक्त होने का मौका मिल जाएगा. वे ख़ुद काे बचाने का और अपना आधार मज़बूत करने का रास्ता ढूंढ लेंगे. उनका मनोबल फिर बढ़ जाएगा.’

हालांकि इस बीच केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा है, ‘मैंने अब तक इस मसले (संघर्ष विराम के) पर उनसे (मुख्यमंत्री महबूबा) सीधे बात नहीं की है. मुझे उनके सुझाव के बारे में ख़बर ज़रूर मिली है. लेकिन पहले मैं दिल्ली पहुंचकर उनसे बात करूंगा. तभी कुछ बता सकूंगा.’ राजनाथ बीएसएफ (सीमा सुरक्षा बल) के एक कार्यक्रम के सिलसिले में लखनऊ में थे.