गुजरात हाई कोर्ट ने 2002 के सांप्रदायिक दंगों के 14 दोषियों की उम्र कैद की सजा बरकरार रखी है जबकि चार लोगों को उसने बरी कर दिया है. इसके अलावा हाई कोर्ट ने पांच अन्य दोषियों की सात साल की सजा को भी बरकरार रखा है. कोर्ट का यह फैसला दंगों के दौरान ओद इलाके में हुई हिंसा के मामले में आया है. ट्रायल कोर्ट ने इन सभी 23 लोगों को दोषी करार दिया था.

पिछले साल जस्टिस हर्षा देवानी और जस्टिस एएस सुपेहिया की बेंच ने इस मामले की सुनवाई पूरी होने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था. शुक्रवार को फैसला सुनाते हुए बेंच ने चार लोगों को छोड़कर सभी दोषियों की सजा बरकरार रखी है.

क्या था ओद नरंसहार?

गुजरात में 27 फरवरी, 2002 के दिन गोधरा के पास साबरमती एक्सप्रेस की एक बोगी में आग लगा दी गई थी. बोगी में अयोध्या से लौट रहे कारसेवक मौजूद थे. आग लगने से 58 लोग बोगी के अंदर ही जिंदा जल गए थे.

इस घटना के बाद गुजरात के कई इलाकों में सांप्रदायिक हिंसा भड़क उठी थी. इस दौरान एक मार्च को ओद कस्बे के पिरावली भोगल इलाके में 2,000 दंगाइयों ने मुस्लिम समुदाय के लोगों पर हमला कर दिया था. वे जान बचाने के लिए एक घर में छुप गए थे. दंगाइयों ने उसी घर पर पेट्रोल और कैरोसिन डालकर आग लगा दी थी. इस घटना में 23 लोग जिंदा जल गए थे जिनमें ज्यादातर महिलाएं और बच्चे थे.