पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की मांग को अगर केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने गंभीरता से लिया तो मुख्यमंत्री राहत कोषों को मिलने वाली रकम में ख़ासा इज़ाफ़ा हो सकता है. बनर्जी ने प्रधानमंत्री मोदी से अपील की है कि निजी कंपनियों की ओर से मुख्यमंत्री राहत कोष में पैसे दिए जाने को सीएसआर (कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी) गतिविधि माना जाए.

हिंदुस्तान टाइम्स के मुताबिक ममता बनर्जी ने इस बाबत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी काे पत्र लिखा है. इसमें उन्होंने कहा है, ‘अगर मुख्यमंत्री राहत कोष में कॉरपोरेट घरानों की ओर से किए जाने वाले वित्तीय योगदान को सीएसआर गतिविधि मान लिया गया तो ग़रीब और ज़रूरतमंदों को ज़्यादा सहयोग मिल सकेगा. साथ ही प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री राहत कोष में योगदान के नियमों में जो भेद है वह भी ख़त्म हो जाएगा.’ बताते चलें कि प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष (पीएमएनआरएफ) में आर्थिक सहयोग देने पर 100 फ़ीसदी टैक्स छूट का प्रावधान है. इसी का नतीज़ा है कि आज इस कोष में 2,875 करोड़ रुपए जमा हो चुके हैं. यह रकम लगातार बढ़ रही है.

बनर्जी की दलील है कि इसी तरह यदि मुख्यमंत्री राहत कोष में कॉरपोरेट घरानों की ओर से किए जाने वाले वित्तीय योगदान को अगर सीएसआर गतिविधि मान लिया गया तो इससे योगतदानकर्ताओं को कर छूट का लाभ मिलने लगेगा. तब वे और ज़्यादा पैसे देने के लिए प्रोत्साहित होंगे. जबकि अभी मुख्यमंत्री राहत कोष हमेशा वित्तीय दबाव में रहता है क्योंकि कॉरपोरेट घराने इसमें ज़्यादा योगदान नहीं देते. इसके चलते जो लोग मुख्यमंत्री राहत कोष से मदद की अपेक्षा रखते हैं उनकी पूरी मदद भी नहीं हो पाती.’