देश की सबसे ज्यादा बिकने वाली सबकॉम्पैक एसयूवी विटारा ब्रेज़ा का ऑटोमेटिक वर्जन लॉन्च हो गया है. लंबे समय से बाजार में इसका इंतजार किया जा रहा था. नए ट्रांसमिशन बॉक्स के साथ मारुति-सुज़ुकी ने अपनी इस शानदार कार में और भी कुछ खास बदलाव किए हैं. ग्लॉस ब्लैक फिनिश वाले नए अलॉय व्हील्स, फ्रंट और रियर साइड में क्रोम फिनिश वर्क और पूरी तरह से ब्लैक इंटीरियर के साथ ऑरेंज कलर के एक्सटिरियर पेंट शेड की वजह से नई ब्रेज़ा काफी फ्रेश नज़र आती है.

इसके अलावा ब्रेज़ा एएमटी के साथ दिए गए डुअल फ्रंट एयरबैग्स, रिवर्स पार्किंग सेंसर्स, एंटीलॉक ब्रेकिंग सिस्टम (एबीएस) और इलेक्ट्रॉनिक ब्रेकफोर्स डिस्ट्रीब्यूशन (ईबीडी) के साथ हाई स्पीड अलर्ट जैसी खूबियां इसे पहले से ज्यादा सुरक्षित बनाती हैं. मारुति-सुज़ुकी ने ब्रेज़ा ऑटोमैटिक के साथ 1.3 लीटर क्षमता वाला मौजूदा डीज़ल इंजन ही इस्तेमाल किया है जो 90 एचपी की अधिकतम पॉवर पैदा करने में सक्षम है.

यह जानना आपको दिलचस्प लग सकता है कि दूसरी गाड़ियों से अलग मारुति ने ब्रेज़ा के हाई एंड वेरिएंट के अलावा इसके बेस वेरिएंट यानी एलडीआई को भी ऑटोमैटिक ट्रांसमिशन बॉक्स विकल्प के साथ बाजार में उतारने का फैसला लिया है. यदि कीमतों की बात करें तो ब्रेज़ा ऑटोमैटिक शुरुआती एक्सशोरूम कीमत (दिल्ली) 8.54 लाख रुपए तय की गई है जो 10.49 लाख रुपए तक जाती है. माना जा रहा है कि ब्रेज़ा ऑटोमैटिक के बाजार में आने से हाल ही में लॉन्च हुई टाटा मोटर्स की नेक्सन ऑटोमैटिक को खासा झटका लग सकता है. क्योंकि टाटा नेक्सन का एक्सज़ेडए+ डीज़ल एएमटी मॉडल कीमत के मामले में नई ब्रेज़ा के टॉप एंड वेरिएंट से दस हजार रुपए ज्यादा है. ऐसे में माना जा रहा है कि जो ग्राहक पहले नेक्सन ऑटोमैटिक खरीदने का मन बना रहे थे अब ब्रेज़ा एएमटी की तरफ झुक सकते हैं.

इस मौके पर मारुति-सुज़ुकी इंडिया लिमिटेड के एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना था, ‘विटारा ब्रेज़ा एक गेम चेंजर के रूप में उभरकर सामने आई एसयूवी है. नौजवान ग्राहकों को ध्यान में रखते हुए हमने कार में आरामदायक ड्राइविंग के लिए दो पैडल तकनीक वाला ऑटो गियर शिफ्ट ट्रांसमिशन लगाया है. हमारा यकीन है कि इससे ब्रेज़ा की बिक्री में और भी ज़्यादा बढ़ेतरी होने वाली है.’

रोल्स रॉयस की पहली एसयूवी ‘कलिनन’ लॉन्च

लग्ज़री कार बनाने के लिए पहचानी जाने वाली ब्रिटिश कंपनी रोल्स रॉयस ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपनी पहली एसयूवी ‘कलिनन’ लॉन्च कर दी है. बताया जा रहा है कि इस शानदार गाड़ी का नाम अफ्रिका से निकलने वाले 3,106 कैरेट के हीरे से प्रभावित होकर रखा गया है. कलिनन को पेश करते हुए रोल्स रॉयस के चेयरमैन और बीएमडब्ल्यू ग्रुप के बोर्ड मेंबर पीटर श्वार्ज़नेबर का कहना था, ‘हमने अपने ग्राहकों के लिए ऐसा वाहन बनाया है जो बेहतर तरीके से ग्राहकों से जुड़ा होने के साथ वैश्विक स्तर पर शानदार परफॉर्मेंस के नए आयाम तय करेगा.’ हालांकि अभी तक यह तय नहीं हो पाया है कि रोल्स रॉयस कलिनन को भारत में कब तक लॉन्च करेगी.

रोल्स रॉयस ने कलिनन में 6.75-लीटर का क्षमता वाला ट्विन-टर्बो वी-12 इंजन लगाया है जो 563 बीएचपी की अधिकतम पॉवर और 850 एनएम का टॉर्क पैदा करने की क्षमता रखता है. कलिनन, ऑल-व्हील ड्राइव विकल्प के साथ बाजार में उतारी गई है. रोल्स रॉयस की सिग्नेचर स्टाइल वाली तमाम आलीशान खूबियोंं के साथ कलिनन के पिछले हिस्से को इस तरह से डिज़ायन किया गया है कि इसे खोलने पर दो चेयर सीट बाहर की तरफ निकलती हैं. यहां सामान रखने के लिए भी खासी जगह उपलब्ध करवाई गई है. रोल्स रॉयस ने कलिनन के लिए करीब सवा दो करोड़ रुपए की शुरुआती कीमत तय की है. बताया जा रहा है कि कलिनन का मुकाबला लैंबोर्ग़िनी की उरुस और बेंटले की बेंटाय्गा से होगा.

इलेक्ट्रिक वाहनों की बैटरी की कीमतों में खासी कमी की संभावना

2030 तक पूरी तरह इलेक्ट्रिक वाहनों पर निर्भर होने की अपनी योजना को लेकर सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय पूरी तरह से मुस्तैद दिख रहा है. इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए शीघ्र नंबर प्लेट देने, कमर्शियल इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए अलग से परमिट जारी करने या फिर 16 वर्ष से कम आयु वाले बच्चों के लिए इलेक्ट्रिक स्कूटरों का लाइसेंस बनवाने जैसी सुविधाएं उपलब्ध करवाने के बाद अब मंत्रालय ने इलेक्ट्रिक वाहनों में लगाई जाने वाली बैटरी की कीमतों में बड़ी रियायत दिए जाने का प्रस्ताव रखा है. दरअसल, इलेक्ट्रिक वाहनों में बैटरी सबसे मंहगा पुर्जा होती है जिसके दाम घटते ही उस वाहन की भी कीमत खासी कम की जा सकती है. फिलहाल इन बैटरियों पर 28% जीएसटी लगाया जा रहा है जिसे घटाकर 12% किए जाने की बात कही गई है.

जानकारों के मुताबिक यदि ऐसा हो पाया तो इससे न सिर्फ इलेक्ट्रिक वाहनों की असेंबली बल्कि इनका घरेलू उत्पादन भी बढ़ेगा, क्योंकि देश में अभी तक बड़ी मात्रा में बैटरियां चीन और अमेरिका देशों से आयात की जाती हैं. हालांकि बताया जा रहा है कि इस प्रस्ताव के तहत उन कारों को शामिल नहीं किया जाएगा जिन्हें भारत में पूरी तरह आयात किया जाता है.

एक रिपोर्ट के मुताबिक 2010 में इलेक्ट्रिक कार बैटरी की प्रति किलो कीमत 1000 डॉलर थी जो अब घटकर 225-250 डॉलर तक पहुंच गई है. विशेषज्ञों के मुताबिक आने वाले समय में बैटरी की कीमतों में और कमी देखने को मिल सकती है. ऐसे में यदि सरकार इन पर लगने वाला जीएसटी कम करने में सफल रही तो इलेक्ट्रिक वाहनों की तरफ ग्राहकों को लुभाने में आसानी रहेगी.