पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने तकरीबन मान लिया है कि 2008 के मुंबई हमले के पीछे उनके देश के ही आतंकवादियों का हाथ था. अब सवाल है कि नवाज शरीफ की इस स्वीकारोक्ति से जमीनी हालात में क्या वास्तविक बदलाव आ सकते हैं? भारत के लिए शायद बहुत कम, लेकिन पाकिस्तान के लिए इससे बहुत कुछ बदलने की संभावना है. हां, लेकिन यह भी सही है कि पाकिस्तान में उनके लिए कुछ नहीं बदलेगा जो सबकुछ जानते हुए भी कुछ न जानने का नाटक कर रहे हैं.

बाकी जो लोग जानते हैं, वे यह भी मानते हैं कि जिन आतंकवादियों ने मुंबई पर हमला किया था वे पाकिस्तानी थे और उन्हें वहीं से निर्देश भी मिल रहे थे. इस बार नया बस यह हुआ है कि पाकिस्तान की राजनीति से जुड़ा एक दिग्गज यह मान रहा है कि उसके देश में तब क्या चल रहा था. पाकिस्तान के अखबार डॉन से बातचीत में शरीफ ने यह भी कहा है कि जो लोग मुंबई हमले के आरोपित हैं, उनकी सुनवाई में जानबूझकर ढिलाई बरती गई थी.

नवाज शरीफ के इन बयानों ने भारत के कूटनीतिक प्रयासों को और ताकत दे दी है जिससे उसे पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-थलग करने में मदद मिलेगी. हालांकि, इससे पाकिस्तान के मुख्य सरपरस्त चीन पर कोई फर्क नहीं पड़ने वाला. वहीं अमेरिका पाकिस्तान को सैन्य और नागरिक सहायता देता रहेगा क्योंकि उसे अफगानिस्तान में इस्लामाबाद की मदद चाहिए. जहां तक रूस, ईरान या दूसरे देशों की बात है तो वे पहले से ही पाकिस्तान के रवैए से परिचित हैं.

इस सबके बावजूद नवाज शरीफ का बयान इस मायने में बेहद खास है कि उन्होंने इसके जरिए देश की सेना के खिलाफ एक मोर्चा खोल दिया है जो असल में यहां की सत्ता नियंत्रित करती है. उन्होंने यह भी कहा है कि दुनिया में पाकिस्तान की आतंक से पीड़ित होने की बात कोई गंभीरता से नहीं लेता क्योंकि उसकी सेना भारत पर हमले करने वाले आतंकियों की समर्थक है.

यह कहकर कि सेना देश को नुकसान पहुंचा रही है, शरीफ ने पाकिस्तान में नागरिक सरकार मजबूत करने की जरूरत जता दी है. हालांकि इस बयान के बाद पाकिस्तान के दूसरे बड़े राजनीतिक दिग्गज इमरान खान तुरंत सेना के समर्थन में उतर आए. कट्टरपंथी भी आगे यही करने वाले हैं. नवाज शरीफ को प्रधानमंत्री के पद से हटाने और फिर पिछले दिनों उन्हें जीवनभर के लिए राजनीति से अयोग्य ठहराने का काम किया तो अदालत ने है, लेकिन माना जाता है कि इसके पीछे सेना का हाथ था.

शरीफ द्वारा पाकिस्तानी सैन्य प्रतिष्ठान पर इस तरह हमला करने से यह बात और साफ हो गई है कि सेना पूरा देश चलाती है. इसके साथ ही वह अपने रणनीतिक उद्देश्यों के लिए जिहादी आतंकवाद को बढ़ावा भी देती है, जिससे देश में लोकतंत्र कमजोर बना रहता है. अब जरूरत है कि नवाज शरीफ धार्मिक कट्टरपंथियों के खिलाफ भी मोर्चा खोलने का साहस दिखाएं और जो कुलीन तबका तमाम जायज-नाजायज तरीके अपनाकर सिर्फ अपने लिए सुख-सुविधाएं जुटाने में लगा है, उसके खिलाफ लोगों को एकजुट करें. (स्रोत)