उत्तर प्रदेश और दिल्ली-एनसीआर सहित देश के कई राज्यों में रविवार शाम को आए आंधी-तूफान में 49 लोगों की मौत हो गई. तूफान से बड़े पैमाने पर संपत्तियों को नुकसान भी पहुंचा है. इस खबर को आज के अधिकतर अखबारों ने पहले पन्ने पर जगह दी है. बताया जाता है कि अकेले उत्तर प्रदेश में 21 लोगों की मौत हो गई. इसके अलावा दिल्ली-एनसीआर में भी पांच लोगों की मौत हुई है.

उधर, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस प्राकृतिक आपदा से हुई मौतों पर दुख प्रकट किया है. साथ ही, उन्होंने अधिकारियों को प्रभावित लोगों की हर संभव मदद मुहैया कराने का निर्देश दिया है. उन्होंने ट्विटर पर लिखा, ‘देश के कुछ हिस्सों में आंधी के चलते लोगों की मौत की सूचना से दुखी हूं. शोक संतप्त परिजनों को मेरी संवेदनाएं. घायलों के जल्द स्वस्थ होने की ईश्वर से प्रार्थना करता हूं.’

जानबूझकर अस्थायी रूप से इंटरनेट बंद करने को लेकर भारत दुनियाभर में अव्वल

किसी घटना की वजह से जानबूझकर अस्थायी रूप से इंटरनेट बंद करने को लेकर भारत दुनियाभर में अव्वल है. अमर उजाला ने यूनेस्को की एक रिपोर्ट के हवाले से कहा है कि मई, 2017 से अप्रैल, 2018 के बीच दक्षिण एशिया में इंटरनेट बंद करने के कुल 97 मामले सामने आए हैं जिनमें 82 मामले अकेले भारत से संबंधित हैं. वहीं, भारत में इंटरनेट पर प्रतिबंध के आधे मामले केवल कश्मीर घाटी से संबंधित हैं. सबसे अधिक (45 दिन) दिनों के लिए इंटरनेट को बंद तब किया गया था जब पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग में गोरखालैंड आंदोलन चल रहा था.

अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति कानून को नौंवी अनुसूची में शामिल करने पर विचार

केंद्र सरकार अब अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निरोधक) कानून पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को निष्प्रभावी करने की पूरी तैयारी में है. दैनिक जागरण की पहली खबर के मुताबिक सरकार इससे संबंधित अध्यादेश लाने वाली है. साथ ही, इसके बाद संसद में इससे संबंधित विधेयक भी पेश किया जाना है. अखबार ने सूत्रों के हवाले से कहा है कि इस विधेयक के जरिए इस कानून को संविधान के नौंवी अनुसूची में शामिल किया जाएगा जिससे इसे आगे किसी तरह की न्यायिक चुनौती का सामना नहीं करना पड़ेगा. इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने अपने एक आदेश के जरिए इस कानून के तहत तत्काल गिरफ्तारी पर रोक लगा दी थी. सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की अगली सुनवाई 16 मई को तय है.

संघर्ष विराम को लेकर अब पाकिस्तान और अलगाववादी संगठनों की ओर उम्मीद भरी नजर

जम्मू-कश्मीर में रमजान और अमरनाथ यात्रा के दौरान एकतरफा संघर्षविराम का भाजपा द्वारा विरोध किए जाने के बाद अब मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती को पाकिस्तान और अलगाववादी संगठनों से उम्मीद है. द हिंदू की रिपोर्ट के मुताबिक महबूबा मुफ्ती के करीबी पीडीपी नेता पीर मंसूर ने बताया कि पाकिस्तान के लिए संघर्ष विराम की घोषणा किए जाने को लेकर यह सही वक्त है. उधर, रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस बारे में कहा है, ‘मैं सोचती हूं कि जम्मू-कश्मीर के मामले का गहरी संवेदनशीलता के साथ समाधान किया जाना अहम है. भारतीय सेना कश्मीर और देश के बाकी हिस्से में शांति और सौहार्द को खतरा पहुंचाने वाले किसी भी आतंकवाद का सामना अच्छी तरह कर सकती है.’

आठ हवाई अड्डों को निजी हाथों में सौंपने पर विचार

केंद्र की मोदी सरकार अब हवाई अड्डों को पूरी तरह निजी हाथों में सौंपने पर विचार कर रही है. बिजनेस स्टैंडर्ड की रिपोर्ट के मुताबिक इसके तहत चेन्नई, कोलकाता, कोच्चि, पुणे, अहमदाबाद, जयपुर, लखनऊ और गुवाहाटी के हवाई अड्डों को निजी हाथों में सौंपने की योजना है. इससे पहले हवाई अड्डों के टर्मिनल के रखरखाव को लेकर निजी क्षेत्र ने कोई रुचि जाहिर नहीं की थी. पिछली यूपीए सरकार ने भी यह योजना शुरू की थी लेकिन, कर्मचारी संगठनों के विरोध की वजह से इसे ठंडे बस्ते में डाल दिया था.