केंद्र के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय और दूरदर्शन-आकाशवाणी जैसे सरकारी चैनलों का कामकाज देखने वाली संस्था- प्रसार भारती के बीच अनबन लंबे समय से चल रही है. अब ख़बर आई है कि इस अनबन की गाज़ दूरदर्शन-आकाशवाणी के कुछ कर्मचारियों पर गिरने वाली है. इन दोनों संस्थाओं में कर्मचारियों की छंटनी की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है.

द एशियन एज़ के मुताबिक सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने काफ़ी समय से प्रसार भारती पर दबाव बनाया हुआ है कि वह दूरदर्शन-आकाशवाणी के कर्मचारियों की संख्या कम करे. मंत्रालय की आपत्ति उन कर्मचारियों को लेकर ख़ास तौर पर है जो दूरदर्शन और आकाशवाणी में अनुबंध पर काम करते हैं. आकस्मिक (कैज़ुअल) तौर पर या सलाहकार की हैसियत से बुलाए जाते हैं. दूरदर्शन-आकाशवाणी में ऐसे कर्मचारियों की संख्या ज़रूरत से कुछ ज़्यादा ही बताई जाती है. मंत्रालय चाहता है कि इस तादाद को जितनी जल्दी हो कम किया जाए ताकि इनकी वज़ह से पड़ने और बढ़ने वाले आर्थिक बोझ को संतुलित किया जा सके.

सूत्र बताते हैं कि प्रसार भारती अब तक मंत्रालय के इस सुझाव को मानने के लिए तैयार नहीं था. इसके चलते प्रसार भारती के कर्मचारियों की तनख़्वाह भी कुछ समय तक मंत्रालय द्वारा रोक लिए जाने की ख़बरें आईं. और भी अन्य तरीकों से दबाव बनाया गया जिसका नतीज़ा यह हुआ कि अब संभवत: प्रसार भारती मंत्रालय के सामने झुकने काे तैयार हो गया है. सूत्रों के मुताबिक सोमवार को ही प्रसार भारती बोर्ड की बैठक होने वाली है. इसमें कर्मचारियों की छंटनी के प्रस्ताव पर विचाार-विमर्श हो सकता है. साथ ही उस वैकल्पिक इंतज़ामों पर भी विचार हो सकता है जो इतनी बड़ी तादाद में कर्मचारियों की छंटनी के बाद करने पड़ेंगे.