राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) आरएसएस एक पदाधिकारी रविंदर गोसाईं की हत्या के मामले में सिख आतंकवादी समूहों की भूमिका की जांच कर रही है. यह हत्या बीते साल हुई थी. द हिंदू की एक रिपोर्ट के मुताबिक इस मामले में पिछले साल आतंकी समूह खालिस्तान लिबरेशन फोर्स (केएलएफ) के सदस्य हरदीप सिंह को गिरफ्तार किया गया था. हरदीप ने बताया था कि उसे रविंदर गोसाईं की हत्या करने को कहा गया था. खबर के मुताबिक इसके बाद हरदीप और उसके साथी रमनदीप सिंह ने लुधियाना में गोसाईं की गोली मार कर हत्या कर दी थी.

एनआईए के मुताबिक हरदीप और रमनदीप पंजाब में 2016 से 2017 के दौरान हत्या और हत्या की कोशिश के आठ मामलों में शामिल हैं. जांच एजेंसी का कहना है कि भारत और दुनियाभर में फैले सिख कट्टरवादी तत्व पंजाब में अस्थिरता पैदा करने की साजिश कर रहे हैं. उसने बताया कि साल 2000 में मलेशिया में एक खालिस्तान समर्थक समूह ने केएलएफ को दोबारा शुरू करने का काम किया था. उसके मुताबिक पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई की इसमें प्रमुख भूमिका थी.

अखबार के मुताबिक हरदीप सिंह 19 साल का था जब केएलएफ ने पहली बार उस पर नजर गड़ाई थी. उस समय वह इटली में रहता था. केएलएफ के एक सदस्य हरमिंदर सिंह मिट्टू को उसमें आतंकी बनने की संभावनाएं नजर आईं. इसके बाद वह इटली स्थित उसके घर आने लगा. बाद में उसने हरदीप से अपना स्काइप आईडी भी शेयर किया. पिछले साल एनआईए द्वारा गिरफ्तार किए जाने के बाद हरदीप ने बताया कि जब भी उसे किसी को मारने का काम दिया जाता था तो वह इटली से भारत आता था. इसके लिए उसे इटली में ही ट्रेनिंग दी गई थी.

बीती पांच मई को एनआईए ने रविंदर गोसाईं की हत्या के मामले में 15 लोगों के खिलाफ चार्जशीट दायर की थी. मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक इनमें से कई आरोपितों के ब्रिटेन, इटली और ऑस्ट्रेलिया सहित कई देशों में होने की आशंका है.

हाल में खालिस्तान समर्थक तत्वों की भारत के खिलाफ गतिविधियां बढ़ी हैं. कुछ दिन पहले खबर आई थी कि दूसरे देशों में सक्रिय खालिस्तान समर्थक समूह पंजाब में आतंकवाद को फिर जिंदा करने के लिए स्थानीय अपराधियों की भर्ती कर रहे हैं. खुफिया विभाग (आईबी) ने गृह मंत्रालय को भेजी अपनी एक रिपोर्ट में कहा था कि इन समूहों को पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई की तरफ से तकनीकी और आर्थिक मदद मिल रही है.