दक्षिण भारतीय फिल्मों के सुपर स्टार रजनीकांत सधे कदमों से अपनी राजनीतिक पारी आगे बढ़ा रहे हैं. उन्होंने बीते साल दिसंबर में राजनीति में आने का ऐलान किया था. लेकिन अब तक अपनी पार्टी नहीं बनाई है. अलबत्ता रजनी मक्कल मंद्रम (आरएमएम) नाम के अपने प्रशंसकों के संगठन के ज़रिए आहिस्ता-आहिस्ता राजनीतिक गतिविधियां चला रहे हैं. इसके तहत उन्होंने हाल में ही आरएमएम की युवा इकाई की बैठक ली. इसमें पदाधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया कि 36 साल के ज़्यादा उम्र के लोगों को सदस्यता न दी जाए.

ख़बरों के मुताबिक रजनीकांत ने युवा इकाई की सदस्यता के लिए उम्र सीमा तय की है. हालांकि संगठन के पदाधिकारियों ने इस उम्र सीमा को थोड़ा बढ़ाने का आग्रह किया है. वे चाहते हैं कि इसे कम से कम 39 साल कर दिया जाए. सूत्र बताते हैं कि रजनी ने इस सुझाव पर विचार करने आश्वासन दिया है. अलबत्ता आयु सीमा इससे ज़्यादा बढ़ने की संभावना नहीं है. बताया जाता है कि रजनीकांत राजनीति में कुछ अलग करने की मंशा रखते हैं. इसलिए वे दूसरी पार्टियों के जैसे चलन को शुरू नहीं करना चाहते.

ग़ौरतलब है कि अधिकांश राजनीतिक दलों में 50-50 साल तक के नेता युवा इकाई के प्रमुख बनाए जाते हैं. तमिलनाडु में द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) के कार्यकारी प्रमुख एमके स्टालिन (अभी 65 साल के हैं) तो 63 साल की उम्र तक पार्टी की युवा इकाई के अध्यक्ष रहे. डीएमके की युवा इकाई के मौज़ूदा अध्यक्ष एमपी समिनाथन भी 51 साल के हैं. दूसरी कई पार्टियों के भी यही हाल हैं.

ख़बरों की मानें तो रजनीकांत ने युवा इकाई के लिए एक और क़ायदा तय किया है. उन्होंने कहा है कि कॉलेज में पढ़ने वाले बच्चों को युवा इकाई का सदस्य तो बनाया जा सकता है लेकिन उन्हें ज़िम्मेदारी या बड़ा काम न दिया जाए. उनके मुताबिक ऐसे सदस्यों से कहा जाए कि पहले वे पढ़ाई पूरी करें. इसके बाद सार्वजनिक जीवन में प्रवेश करें. हालांकि इन तमाम स्पष्ट निर्देशों के बावज़ूद रजनीकांत ने यह अब भी नहीं बताया कि वे अपनी पार्टी का ऐलान कब करेंगे.