पश्चिम बंगाल में पंचायत चुनावों के दौरान अलग-अलग इलाकों में हुई हिंसा में 14 लोगों की मौत हो गई और 40 से ज्यादा लोग घायल हो गए हैं. घायलों में पांच पत्रकार भी शामिल हैं. उत्तर और दक्षिण 24 पगरना, नदिया, मुर्शिदाबाद और दक्षिण दिनाजपुर जिलों सहित राज्य के कई हिस्सों में सत्तारुढ़ तृणमूल कांग्रेस और विपक्षी दलों के समर्थकों के बीच झड़प हुई. उधर, इस हिंसा पर केंद्र ने राज्य सरकार से रिपोर्ट मांगी है. इस मामले पर कोलकाता हाईकोर्ट ने भी चुनाव आयुक्त और गृह सचिव को समन जारी किया है.

पश्चिम बंगाल के पंचायत चुनाव काफी विवादों में रहे हैं. इसे देखते हुए यहां राज्य पुलिस के अलावा सिक्किम, ओडिशा, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना से आए पुलिस बल को भी तैनात किया गया था ताकि मतदान शांतिपूर्वक कराया जा सके. बताया जा रहा है कि पश्चिम बंगाल और अन्य राज्यों के करीब एक लाख 54 हजार पुलिसकर्मी और स्वयंसेवी इस काम में लगे थे. इस सबके बावजूद हिंसा की घटनाएं नहीं रोकी जा सकीं.

भाजपा ने इस हिंसा का का जिम्मेदार सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस को बताया है. आसनसोल से सांसद और केंद्रीय मंत्री बाबुल सुप्रियो ने कहा, ‘पश्चिम बंगाल सरकार एक बेशरम सरकार है. आप उससे किसी भी तरह के नियमों के पालन की उम्मीद नहीं कर सकते.’ बाबुल सुप्रियो ने राज्य में तुरंत राष्ट्रपति शासन लगाने की मांग भी की.

उधर, हिंसा की घटनाओं पर राज्य के खाद्य मंत्री ज्योतिप्रिय मल्लिक ने भाजपा पर आरोप लगाते हुए कहा कि वह राज्य में हिंसा कराने के लिए सैकड़ों लोगों को बांग्लादेश से लाई है. उधर, तृणमूल कांग्रेस नेता पार्थ चटर्जी ने कहा कि छोटी-मोटी घटनाओं को छोड़ दें तो मतदान शांतिपूर्ण रहा है.