कर्नाटक विधानसभा चुनाव के नतीजों का कुछ असर उत्तर प्रदेश पर भी पड़ सकता है. लेकिन उसी वक्त जब कर्नाटक में किसी भी पार्टी को सरकार बनाने लायक बहुमत न मिले.

द टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक अगर कर्नाटक में किसी पार्टी को बहुमत न मिला तो जनता दल-सेकुलर (जद-एस) की भूमिका अहम हो जाएगी. वह कांग्रेस या भारतीय जनता पार्टी जिसके साथ भी जाने का फैसला करेगी, ज़ाहिर तौर पर सरकार भी वही पार्टी बनाएगी. ऐसे में अगर जद-एस ने भाजपा के साथ जाने का फै़सला किया तो असर उत्तर प्रदेश की राजनीति पर भी हो सकता है. इसकी वज़ह ये है कि कर्नाटक में जद-एस के साथ बहुजन समाज पार्टी का चुनावी गठबंधन है, जाे कि उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी के साथ हाथ मिलाकर चुनाव में उतरने की तैयारी कर रही है. सूत्र बताते हैं कि अगर बसपा ने भाजपा के साथ जाने के जद-एस के फैसले का समर्थन किया तो सपा उसके साथ अपने गठबंधन पर पुनर्विचार कर सकती है.

उधर एक अन्य घटनाक्रम में राज्य के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने संकेत दिया है कि चुनाव नतीजे के बाद अगर कांग्रेस किसी दलित नेता को सरकार की कमान सौंपने का फैसला करेगी तो वे बेहिचक अपनी दावेदारी छोड़ देंगे. मैसुरु में पत्रकारों से बातचीत करते हुए सिद्धारमैया ने कहा, ‘आप ज़बर्दस्ती किसी को मुख्यमंत्री नहीं बना सकते. यह बहुत मुश्किल है. इस तरह आप सरकार नहीं चला सकते. विधायकों की राय लेनी ही पड़ेगी. फिर भी अगर पार्टी कहेगी कि वह दलित नेता को मुख्यमंत्री बनाना चाहती है तो मैं कहूंगा- बिल्कुल, आगे बढ़िए.’ सिद्धारमैया के इस बयान के बाद माना जा रहा है कि बहुमत हासिल पर कांग्रेस दलित नेता मल्लिकार्जुन खड़गे या राज्य इकाई के अध्यक्ष जी परमेश्वरा में से किसी को मुख्यमंत्री बनाने की सोच सकती है.