मई 2014 में सत्ता में आने के बाद से नरेंद्र मोदी सरकार ने प्रचार पर 4343 करोड़ रुपये खर्च किए हैं. द इंडियन एक्सप्रेस की एक खबर के मुताबिक यह जानकारी सूचना का अधिकार (आरटीआई) के तहत पूछे गए एक सवाल के जवाब में दी गई है. सूचना और प्रसारण मंत्रालय के तहत आने वाले ब्यूरो ऑफ आउटरीच कम्युनिकेशन ने बताया है कि यह खर्च आउटडोर पब्लिसिटी (होर्डिंग्स, बैनर इत्यादि) से लेकर प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया तक तमाम माध्यमों पर दिए गए विज्ञापनों पर हुआ है. मिली जानकारी के मुताबिक इनमें से 1732 करोड़ रु प्रिंट मीडिया यानी अखबार, पत्रिका आदि में दिए गए विज्ञापनों पर खर्च हुए हैं. 2079 करोड़ रु इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में दिए गए विज्ञापनों पर खर्च हुए हैं. इसमें टीवी, इंटरनेट और रेडियो आते हैं.

2015 में एक आरटीआई से खुलासा हुआ था कि केंद्र ने जुलाई 2015 तक प्रधानमंत्री के रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ के लिए अखबारों में करीब 8.5 करोड़ रुपये के विज्ञापन दिए थे. इस पर कांग्रेस ने सरकार की काफी आलोचना की थी. इसके बाद भाजपा और कांग्रेस दोनों ने इस खबर के बाद आम आदमी पार्टी को निशाने पर लिया था कि दिल्ली में उसकी सरकार ने 2015 में अपनी उपलब्धियों के प्रचार के लिए 526 करोड़ रुपये खर्च किए. अब प्रचार के लिए 4343 करोड़ रु का भारी-भरकम आंकड़ा सामने आने के बाद मोदी सरकार का भी विरोधियों के निशाने पर आना तय दिख रहा है.