कर्नाटक चुनाव बीतने के ठीक दो दिन बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने मंत्रिमंडल में कई बदलाव किए हैं. इस खबर को आज के अखबारों ने पहले पन्ने पर जगह दी है. खराब सेहत से जूझ रहे केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली की जगह केंद्रीय रेल मंत्री पीयूष गोयल को वित्त मंत्रालय और कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय का अतिरिक्त कार्यभार दिया गया है. वहीं, स्मृति ईरानी से सूचना और प्रसारण मंत्रालय वापस ले लिया गया है. इसकी जिम्मेदारी अब खेल मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौर को दी गई है.

उधर, पश्चिम बंगाल में पंचायत चुनावों के दौरान अलग-अलग इलाकों में हुई हिंसा में 12 लोगों की मौत हो गई और 40 से ज्यादा लोग घायल हो गए. यह खबर भी अखबारों की प्रमुख सुर्खियों में शामिल है. उत्तर और दक्षिण 24 पगरना, नदिया, मुर्शिदाबाद और दक्षिण दिनाजपुर जिलों सहित राज्य के कई हिस्सों में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस और विपक्षी दलों के समर्थकों के बीच झड़प हुई. उधर, इस हिंसा पर केंद्र ने राज्य सरकार से रिपोर्ट मांगी है. इस मामले पर कलकत्ता हाईकोर्ट ने भी चुनाव आयुक्त और गृह सचिव को समन जारी किया है.

कर्नाटक चुनाव अब तक का सबसे महंगा विधानसभा चुनाव

विधानसभा चुनाव के इतिहास में कर्नाटक चुनाव अब तक के सबसे महंगे चुनाव के रूप में सामने आया है. हिन्दुस्तान ने सेंटर फॉर मीडिया स्टडीज (सीएमएस) की रिपोर्ट के आधार पर कहा है कि इस चुनाव पर राजनीतिक दलों ने करीब 10,000 करोड़ रुपये खर्च किया है. हालांकि, इसमें भाजपा के स्टार प्रचारक नरेंद्र मोदी के अभियान में हुआ खर्च शामिल नहीं है. सीएमएस की मानें तो यह खर्च साल 2013 के कर्नाटक चुनाव के खर्च से दोगुना है. इसके अलावा उम्मीदवारों के व्यक्तिगत खर्च में 75 फीसदी तक बढ़ोतरी दर्ज की गई है. संस्था के एन भास्कर राव का कहना है कि अगर चुनाव अभियान में खर्च की दर यही रही तो 2019 के लोक सभा चुनाव में खर्च का यह आंकड़ा 60,000 करोड़ रुपये तक खर्च होने का अनुमान है. बीते लोक सभा चुनाव में यह आंकड़ा 30,000 करोड़ रुपये था.

वित्तीय सेहत सुधारने के लिए बैंकों के खिलाफ आरबीआई का रुख सख्त होने के आसार

बैंकों की वित्तीय सेहत सुधारने और उनके कामकाज में अधिक पारदर्शिता लाने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) देना बैंक के बाद अन्य बैंकों के खिलाफ भी सख्त रुख अपना सकता है. इससे पहले केंद्रीय बैंक ने देना बैंक पर नए कर्ज देने और नई नियुक्तियां करने पर रोक लगा दी थी. नवभारत टाइम्स ने सूत्रों के हवाले से कहा है कि 17 मई को वित्त मंत्रालय ने इस बारे में बैठक बुलाई है. बताया जाता है कि इस बैठक में 11 बैंकों की वित्तीय सेहत सुधारने के कदमों और उनके वित्तीय नतीजों की समीक्षा की जाएगी. साथ ही, इस समीक्षा के बाद ही फैसला किया जाएगा कि इन बैंकों को लेकर सख्ती की जाए या नहीं. इन बैंकों में सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया और ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स शामिल हैं.

देश में कई प्रबंधन संस्थानों पर काले बादल

देश में इंजीनियरिंग कॉलेजों की ही तरह कई प्रबंधन (मैनेजमेंट) संस्थान बंद होने के कगार पर हैं. बिजनेस स्टैंडर्ड की रिपोर्ट के मुताबिक इसके पीछे कई वजह हैं जिनमें छात्रों और योग्य शिक्षकों की कमी के साथ संस्थानों की आर्थिक स्थिति भी शामिल है. अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीई) की मानें तो साल 2014-15 में प्रबंधन कॉलेजों की संख्या 3,609 थी. यह 2017-18 में घटकर 3,264 रह गई. बताया जाता है कि इस साल करीब 101 संस्थानों ने अपने प्रबंधन पाठ्यक्रम बंद करने का अनुरोध किया है. संस्थानों की संख्या में कमी के बाद प्रबंधन सीटों की संख्या में भी कमी आई है. साल 2014-15 में इस कोर्स के छात्रों की संख्या 4,56,419 थी, जो 2017-18 में घटकर 3,94,835 रह गई. इस दौरान शिक्षकों की संख्या भी 60,360 से घटकर 55,876 हो गई.

ओडिशा : दो मुठभेड़ों में दो महिलाओं सहित सात नक्सली मारे गए

ओडिशा के कंधमाल और बालागिर जिले में दो कथित मुठभेड़ों में सात नक्सली मारे गए हैं. इनमें दो महिलाएं भी शामिल हैं. द हिंदू की रिपोर्ट के मुताबिक सुरक्षा बलों ने अब तक चार नक्सलियों के शवों को बरामद कर लिया गया है. बताया जाता है कि इन शवों को बीते रविवार कंधमाल स्थित सुदुरकुम्पा वन में सुरक्षा बलों और नक्सलियों के बीच मुठभेड़ के बाद बरामद किया गया है. इससे पहले महाराष्ट्र के गढ़चिरौली में भी मुठभेड़ में करीब 40 नक्सलियों के मारे जाने की बात सामने आई थी.