आज यानी मंगलवार, 15 मई को कर्नाटक के चुनाव नतीजे आ रहे हैं. मतों की गिनती से अब तक जो रुझान सामने आया है उसके मुताबिक सत्ताधारी कांग्रेस भाजपा से साफ तौर पर पिछड़ती दिख रही है. इसके बावज़ूद सूत्रों की मानें तो कांग्रेस ने ऐसी योजना भी बनाई है जिनसे कि अगर किसी पार्टी काे स्पष्ट बहुमत न मिले तो वह गठबंधन सरकार बना ले. चूंकि राज्य में गठबंधन सरकार के गठन में तीसरी पार्टी- जनता दल-सेकुलर (जद-एस) की भूमिका अहम होगी इसलिए कांग्रेस लगातार उसके नेताओं के संपर्क में भी है, ऐसी ख़बरें हैं. बल्कि कहा तो यहां तक जा रहा है कि जद-एस के शीर्ष नेता और कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी की औचक सिंगापुर यात्रा भी कांग्रेस के साथ उनकी पार्टी के गठबंधन की इसी योजना का हिस्सा है.

द एशियन एज़ के मुताबिक चुनाव नतीजे से ठीक पहले दो दिन की सिंगापुर यात्रा पर कुमारस्वामी यूं ही नहीं गए हैं. बल्कि उनकी यह यात्रा संभावित गठबंधन संबंधी योजना का हिस्सा है. उच्च पदस्थ सूत्रों की मानें तो उनके पीछे-पीछे जद-एस के सांसद कुपेंद्र रेड्‌डी और रियल एस्टेट (ज़मीन-जायदाद) के बड़े कारोबारी वीरन्ना रेड्‌डी भी सिंगापुर गए हैं. बताया जाता है कि पार्टी ने इस काम में कुमार स्वामी का साथ देने के लिए कुपेंद्र और वीरन्ना को ख़ास तौर पर चुना है क्योंकि ये दोनों ही जद-एस प्रमुख और पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवेगौड़ा के नज़दीकी हैं. इनकी लोक सभा में कांग्रेस संसदीय दल के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे से भी निकटता है.

ख़बर यह भी है कि कांग्रेस की ओर से संभावित गठबंधन पर बात आगे बढ़ाने और रणनीति तय करने के लिए राज्य सभा में नेता प्रतिपक्ष और वरिष्ठ कांग्रेसी ग़ुलाम नबी आज़ाद तथा संगठन महासचिव अशोक गहलोत भी बेंगलुरु पहुंच गए हैं. इन दोनों नेताओं ने सोमवार शाम मुख्यमंत्री सिद्धारमैया से मुलाक़ात कर उनका मन टटोला है. बताया जाता है कि सिद्धारमैया ने इन नेताओं से कहा है कि संभावित गठबंधन यदि दलित मुख्यमंत्री के नेतृत्व की शर्त पर बनता है तो उन्हें पद छोड़ने में कोई दिक्क़त नहीं होगी. ख़बरों की मानें तो ऐसी सूरत में मल्लिकार्जुन खड़गे या जी परमेश्वरा के नाम पर कांग्रेस और जद-एस में सरकार बनाने की सहमति हो सकती है.

सूत्रों के मुताबिक कांग्रेस को ख़ुफ़िया रिपोर्ट भी मिली थी कि वह शायद 100 या 105 से ज़्यादा सीटें नहीं जाती पाएगी. जबकि सरकार बनाने के लिए कम से कम 112 सीटों की ज़रूरत होगी. ऐसे में भाजपा निश्चित रूप से फिर ऐसी जुगत भिड़ाने की कोशिश करेगी कि वह दूसरे नंबर रहने के बाद भी गोवा और मणिपुर की तरह बाहरी मदद से सरकार बना ले. लिहाज़ा कांग्रेस ऐसी चाक-चौबंद व्यवस्था करने की कोशिश में है कि कुमारस्वामी को उपमुख्यमंत्री पद देकर उन्हें न सिर्फ़ गठबंधन के लिए मनाया जाए बल्कि कार्यकाल पूरा होने से पहले वे सरकार से बाहर न जा पाएं (ऐसा वे 2004 में कर चुके हैं) इसका भी पुख़्ता इंतज़ाम किया जाए.

ख़बरों की मानें तो इसीलिए कांग्रेस ने किसी जाने-माने दलित चेहरे को संभावित गठबंधन सरकार की अगुवाई की ज़िम्मा सौंपने की तैयारी की है. क्योंकि कुमारस्वामी दलित मुख्यमंत्री की सरकार गिराकर दलितों की नाराज़गी मोल लेने का जोख़िम शायद नहीं उठाएंगे. वैसे कांग्रेस अपनी योजना को कितनी कुशलता से अमलीजामा पहना पाती है इस पर भी संदेह की गुंज़ाइश है क्योंकि पार्टी के ताक़तवर नेता डीके शिवकुमार और रामलिंगा रेड्‌डी तथा आरवी देशपांडे जैसे नेताओं ने भी मुख्यमंत्री पद पर दावेदारी ठोकी है.