क्रिकेटर से राजनेता बने नवजोत सिंह सिद्धू को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है. शीर्ष अदालत ने उन्हें और एक अन्य आरोपित को 30 साल पुराने गैर इरादतन हत्या के एक मामले से बरी कर दिया है. जस्टिस चे चेलमेश्वर और संजय किशन कौल की बेंच ने यह फैसला मंगलवार को सुनाया. दो जजों की बेंच ने इस मामले में हालांकि नवजोत सिंह सिद्धू को मारपीट को दोषी माना जिसके लिए उन पर एक हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है. खबरों के मुताबिक इस फैसले के साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट का फैसला भी पलट दिया है.

यह मामला 1988 का है. बताया जाता है कि पटियाला में कार से जाते समय नवजोत सिंह सिद्धू की गुरनाम सिंह नाम के एक बुजुर्ग से तीखी बहस हो गई थी. इसके बाद दोनों के बीच हाथापाई भी हुई थी. चोट लगने की वजह से गुरनाम सिंह को अस्पताल ले जाया गया जहां उनकी मौत हो गई थी. तब इस मामले में नवजोत सिंह सिद्धू और उनके दोस्त रुपिंदर सिंह के खिलाफ गैर इरादतन हत्या का मामला दर्ज किया गया था. निचली अदालत ने इस मामले में सिद्धू और उनके दोस्त को बरी कर दिया था इसके बाद पीड़ित पक्ष ने पंजाब व हरियाणा हाईकोर्ट में अपील की थी.

हाईकोर्ट ने सिद्धू और रुपिंदर सिंह को इस मामले में दोषी ठहराया था और दोनों को तीन साल कैद की सजा सुनाने के साथ उन पर एक लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया था. बताया जाता है कि हाईकोर्ट से सजा मिलने पर सिद्धू को लोकसभा की सदस्यता से भी इस्तीफा देना पड़ा था. इसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा. दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने बीती 18 अप्रैल को इस मामले में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था.