सुप्रीम कोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद-35ए की वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई टाल दी है. यह अनुच्छेद जम्मू-कश्मीर सरकार को ‘स्थायी निवासियों’ की पहचान करने और उन्हें विशेष अधिकार देने की इजाजत देने से जुड़ा है. खबरों के मुताबिक शीर्ष अदालत अब इससे जुड़ी याचिकाओं पर छह अगस्त को सुनवाई करेगा.

सुप्रीम कोर्ट में अनुच्छेद-35ए के खिलाफ चार याचिकाएं लंबित हैं. इनमें से मुख्य याचिका दिल्ली स्थित एनजीओ वी द सिटिजंस ने लगाई थी. इनमें 1954 में राष्ट्रपति के आदेश से संविधान में शामिल अनुच्छेद-35ए की संवैधानिकता पर सवाल उठाया गया है. याचिकाकर्ताओं के मुताबिक यह एक तरीके का संविधान संशोधन था, जिसका अधिकार केवल संसद को है. हालांकि, संविधान (जम्मू-कश्मीर पर लागू) आदेश-1954 के तहत यह प्रावधान संविधान में परिशिष्ट (अपेंडिक्स) के रूप में मिलता है, न कि संविधान संशोधन के रूप में.

खबरों के मुताबिक चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की बेंच ने केंद्र के अनुरोध पर इन याचिकाओं पर सुनवाई टाली है. सोमवार को अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने बताया कि केंद्र के वार्ताकार दिनेश्वर शर्मा जम्मू-कश्मीर के निर्वाचित प्रतिनिधियों, राजनीतिक दलों, स्थानीय निवासियों और अन्य संगठनों से इस प्रावधान के बारे में बात कर रहे हैं. उन्होंने आगे कहा, ‘यह बहुत संवेदनशील मामला है....इसमें कम से कम तीन हफ्ते से पहले नहीं सुना जाना चाहिए, क्योंकि इसके समाधान का खाका तैयार किया जा रहा है.’ द इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक एक याचिकाकर्ता के अधिवक्ता रंजीत कुमार ने कहा कि इस प्रावधान के चलते राष्ट्रीय पात्रता और प्रवेश परीक्षा पास करने के बावजूद कई छात्रों को जम्मू-कश्मीर के मेडिकल कॉलेजों में दाखिला नहीं मिल पा रहा. उन्होंने इस मामले की जल्द से जल्द सुनवाई की मांग की.