केंद्र सरकार ने पूर्व अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी को लोकपाल चयन समिति में कानून विशेषज्ञ सदस्य नियुक्त किया है. खबरों के मुताबिक मंगलवार को अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने सुप्रीम कोर्ट को यह जानकारी दी. उन्होंने बताया कि सरकार ने इस बारे में 11 मई को फैसला किया था. लोकपाल की नियुक्ति में देरी को लेकर एनजीओ कॉमन कॉज ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगा रखी है. इस याचिका पर अब दो जुलाई को सुनवाई होगी.

लोकपाल चयन के लिए गठित समिति में प्रधानमंत्री, सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश, लोकसभा अध्यक्ष, नेता विपक्ष और एक वरिष्ठ कानून विशेषज्ञ शामिल होते हैं. लेकिन सितंबर 2017 में वरिष्ठ अधिवक्ता पीपी राव के निधन होने की वजह से चयन समिति में कानून विशेषज्ञ का पद खाली चल रहा था.

मुकुल रोहतगी को 2014 में नरेंद्र मोदी की सरकार बनने के बाद अटॉर्नी जनरल बनाया गया था. लेकिन उन्होंने जून 2017 में अपने पद से इस्तीफा दे दिया था. अटॉर्नी जनरल रहने के दौरान मुकुल रोहतगी ने लोकपाल की नियुक्ति में देरी को लेकर सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार का पक्ष रखा था. सुप्रीम कोर्ट में मार्च 2017 में उन्होंने कहा था कि लोकपाल की नियुक्ति के लिए लोकसभा में नेता विपक्ष का होना जरूरी है, चूंकि अभी कोई इस पद पर नहीं है, इसलिए लोकपाल की नियुक्ति में देरी हो रही है. शीर्ष अदालत ने सरकार की इस दलील को नहीं माना था और जल्द से जल्द लोकपाल नियुक्त करने का आदेश दिया था. हालांकि, अभी तक लोकपाल की नियुक्ति नहीं हो पाई है.