कर्नाटक चुनाव के नतीजों और इसके बाद के घटनाक्रम को आज के अधिकतर अखबारों ने पहले पन्ने पर जगह दी है. राज्य में भाजपा 104 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनी है. वहीं, कांग्रेस को 78 और जेडीएस को 38 सीटें हासिल हुई हैं. भाजपा को सरकार बनाने से रोकने के लिए कांग्रेस ने जेडीएस को बिना शर्त समर्थन देने का ऐलान किया है. वहीं, भाजपा ने सबसे बड़ी पार्टी होने के आधार पर राज्यपाल के सामने सरकार बनाने का दावा किया है.

उधर, उत्तर प्रदेश के वाराणसी में निर्माणाधीन फ्लाईओवर का एक हिस्सा गिरने से 19 लोग मारे गए हैं और 12 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं. यह खबर भी अखबारों की प्रमुख सुर्खियों में शामिल है. मलबे में कई लोगों के दबे होने की आशंका है, इसलिए मृतकों की संख्या बढ़ सकती है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री आदित्यनाथ ने इस हादसे पर शोक जताया है.

कांग्रेस और जेडीएस के बीच गठबंधन होने पर 2019 के चुनाव में भाजपा को बड़ा नुकसान

कर्नाटक में सरकार बनाने के लिए कांग्रेस ने जनता दल-सेक्युलर (जेडीएस) को बिना शर्त समर्थन देने की बात कही है. वहीं, द इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक यदि चुनाव पहले कांग्रेस, जेडीएस और बसपा गठबंधन करते तो वे भाजपा को करीब 68 सीटों पर समेट सकते थे जबकि उनके हिस्से में 156 सीटें आ सकती थीं. इस विधानसभा चुनाव में राजनीतिक दलों को हासिल मतों के आधार पर अखबार का कहना है कि यह गठबंधन यदि साल 2019 के आम चुनाव में भी कायम रहता है तो कर्नाटक में भाजपा 28 लोक सभा सीटों में से केवल छह पर सिमट सकती है. इससे पहले 2014 के चुनाव में पार्टी को 17 सीटें हासिल हुई थीं.

चीन : भारत से पहुंचे बौद्ध भिक्षुओं द्वारा बौद्ध धर्म की शिक्षा देने पर रोक

चीन के सिचुआन प्रांत ने भारत से पहुंचे बौद्ध भिक्षुओं द्वारा वहां बौद्ध धर्म की शिक्षा देने पर रोक लगा दी है. नवभारत टाइम्स में छपी खबर के मुताबिक इसके पीछे चीन की यह आशंका है कि ये भिक्षु अलगाववाद को बढ़ावा दे सकते हैं. अखबार ने मीडिया रिपोर्ट्स के आधार पर कहा है कि लितयांग काउंटी में भारतीय मूल के कुछ बौद्ध भिक्षुओं पर गलत तरीके से बौद्ध धर्म की शिक्षा देने का आरोप लगा है. इस काउंटी के एक अधिकारी ने बताया है कि गलत शिक्षा या अलगाववाद के संकेत देने वाले भिक्षुओं पर सख्त नजर रखी जाती है. साथ ही, ऐसा करने पर उन्हें सार्वजनिक रूप से बौद्ध शिक्षा देने से रोक दिया जाता है.

लैंगिक भेदभाव की वजह से भारत में हर साल पांच साल से कम उम्र की 2,39,000 बच्चियों की मौत

लैंगिक भेदभाव की वजह से भारत में हर साल पांच साल से कम उम्र की 2,39,000 बच्चियों की मौत हो जाती है. दैनिक भास्कर ने मेडिकल जर्नल लैंसेट की रिपोर्ट के हवाले से कहा है कि इनमें दो-तिहाई मौतें सिर्फ चार राज्यों-उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान और मध्य प्रदेश में होती हैं. इस रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि भारत में बच्चियों की भ्रूण हत्या तो होती ही है, पैदा होने के बाद भी उन्हें लैंगिक भेदभाव से भी गुजरना होता है. इस रिपोर्ट को तैयार करने में शामिल पेरिस विश्वविद्यालय के क्रिस्टोफर गुइलमोतो का मानना है कि यह भेदभाव अक्सर बच्चियों की मौत की वजह बन जाता है.

पश्चिम बंगाल : पंचायत चुनाव में हुई हिंसा में मरने वालों की संख्या 25 तक पहुंची

पश्चिम बंगाल पंचायत चुनाव में हुई हिंसा की वजह से मरने वालों की संख्या 25 तक पहुंच गई है. द टाइम्स ऑफ इंडिया में प्रकाशित खबर के मुताबिक मंगलवार को 10 और लोगों की मौत हुई है. इससे पहले सोमवार को मतदान के दिन 15 लोगों को जान गंवानी पड़ी थी. दूसरी ओर, हिंसा से प्रभावित 573 बूथों पर आज फिर से मतदान हो रहा है है. इनमें 362 बूथ केवल छह जिलों में स्थित हैं. वहीं, भाजपा ने 2400 बूथों और कांग्रेस ने मालदा के 1000 बूथों पर राज्य चुनाव आयोग से फिर से मतदान की मांग की है. इससे पहले साल 2013 के पंचायत चुनाव में केवल 21 बूथों पर फिर मतदान कराने की जरूरत पड़ी थी.