बीते हफ्ते भारतीय क्रिकेट टीम के चयनकर्ताओं ने इंग्लैंड दौरे के लिए टीम का ऐलान किया. इस दौरान अजिंक्य रहाणे का नाम सबसे ज्यादा चर्चा में रहा. इस चर्चा की वजह उन्हें इंग्लैंड के खिलाफ होने वनडे सीरीज के लिए न चुना जाना था. यह बात चौंकाने वाली इसलिए थी कि एक तो रहाणे को एक लंबे अरसे बाद टीम से बाहर किया गया. दूसरा, यह तब हुआ जब भारतीय टीम के लिए इंग्लैंड दौरा बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि अगले साल विश्व कप भी इंग्लैंड में ही होना है. यही वजह है कि इस दौरे के लिए अजिंक्य रहाणे को न चुने जाने से कई तरह के सवाल उठने लगे हैं. पूछा जा रहा है कि क्या अब यह भारतीय बल्लेबाज विश्व कप नहीं खेल पायेगा और क्या चयनकर्ताओं ने इसे केवल टेस्ट टीम तक ही सीमित कर दिया है.

टीम से बाहर किए जाने की वजह

2015 में हुए विश्व कप के बाद से भारतीय टीम एक बड़ी समस्या से जूझ रही है. यह समस्या चौथे नंबर पर बल्लेबाजी को लेकर है. पिछले तीन सालों में इस नंबर पर कई बल्लेबाजों को मौका दिया गया जिनमें सुरेश रैना, अंबाती रायडू, अजिंक्य रहाणे, केएल राहुल, मनीष पाण्डेय और श्रेयश अय्यर शामिल थे. लेकिन, टीम मैनेजमेंट को कोई भी विश्वनीय और बेहतर विकल्प नहीं मिल सका. चौथे क्रम पर रहाणे के प्रदर्शन में भी निरन्तरता की कमी होना उनके टीम से बाहर होने की पहली वजह है.

इस दौर में विदेशी पिचों पर सबसे बेहतर माने जाने वाले अजिंक्य रहाणे के इंग्लैंड दौरे से बाहर होने की एक और वजह आईपीएल में कई अन्य खिलाड़ियों का बेहतर प्रदर्शन भी है. चयनकर्ताओं ने इंग्लैंड दौरे पर होने वाली वनडे सीरीज के लिए श्रेयश अय्यर, केएल राहुल और अंबाती रायडू तीनों को चुना है. ये तीनों आईपीएल में शानदार प्रदर्शन कर रहे हैं. अय्यर ने आईपीएल के 12 मैचों में 386, केएल राहुल ने 558 और अंबाती रायडू ने इतने ही मैचों में 535 रन बनाए हैं. माना जा रहा है कि विराट कोहली इन तीनों को अब नंबर चार पर मौका देकर परखना चाहते हैं. टीम चयन के बाद कप्तान विराट कोहली का इस मामले पर कहना था, ‘हमने पिछले कुछ महीनों में कई विकल्पों पर विचार किया और उन्हें परखा. हमें विश्व कप से पहले बहुत अधिक वनडे सीरीज नहीं खेलनी हैं. इसलिए हम विश्व कप से पहले सभी विकल्पों को परखना चाहते हैं.’

हालांकि, इंग्लैंड दौरे के लिए चुने गए इन तीन नामों में रहाणे की सबसे ज्यादा मुश्किल केएल राहुल ने बढ़ाई है. बताया जा रहा है कि भारतीय वनडे टीम में राहुल की भूमिका लगभग वैसी ही होगी जैसी अब तक रहाणे की थी. यानी नंबर चार पर सफल होने या न होने के बावजूद उन्हें अतिरिक्त सलामी बल्लेबाज के रूप में 15 सदस्यीय टीम के साथ रखा जाएगा. कई जानकरों का मानना है कि राहुल की फॉर्म और अनुभव दोनों को देखते हुए कम से कम विश्व कप तक तो उनके टीम के साथ बने रहने की पूरी संभावना है. यानी रहाणे को अब सलामी बल्लेबाज के बैकअप के रूप में भी 15 सदस्यीय टीम में जगह मिलना बेहद मुश्किल है.

परिस्थितयां ज्यादा जिम्मेदार

अजिंक्य रहाणे उन खिलाड़ियों में आते हैं जिन्होंने घरेलू क्रिकेट में अपने प्रदर्शन से धूम मचा दी थी. यही वजह थी कि चयनकर्ताओं को उन्हें तब राष्ट्रीय टीम में चुनने के लिए मजबूर होना पड़ा जब भारतीय टीम के ऊपरी क्रम में सचिन तेंदुलकर, वीरेंद्र सहवाग, गौतम गंभीर और राहुल द्रविड जैसे बड़े नामों का बोलबाला था. रहाणे ने घरेलू क्रिकेट में मुंबई की तरफ से खेलते हुए 110 प्रथम श्रेणी मैचों में 53 से ज्यादा के औसत से 8794 रन बनाए जिनमें 29 शतक शामिल हैं. लिस्ट-ए मैचों में भी उन्होंने 5000 से ज्यादा रन बनाए हैं.

लेकिन, कई क्रिकेट विश्लेषक कहते हैं कि घरेलू क्रिकेट में अपने शानदार प्रदर्शन के दम पर रहाणे ने राष्ट्रीय टीम में जगह तो पा ली लेकिन, परिस्थितियां उनके विपरीत ही रहीं. उन्हें राष्ट्रीय टीम में अपने पसंदीदा क्रम पर खेलने के मौके न के बराबर ही मिल सके. रहाणे ने घरेलू क्रिकेट में बतौर सलामी बल्लेबाज शुरुआत की थी और उन्होंने जबर्दस्त प्रदर्शन भी किया. वे कई बार तीसरे नंबर पर भी खेले और अच्छे नतीजे दिए. यानी साफ़ था कि रहाणे या तो ओपनर के तौर पर परिपक्व थे या फिर तीसरे नंबर पर.

लेकिन, जब साल 2011 में उनका चयन राष्ट्रीय टीम में हुआ तो उसमें सचिन तेंदुलकर, वीरेंद्र सहवाग और गौतम गंभीर के चलते उन्हें इन जगहों पर न के बराबर ही मौका मिला. हालांकि, इन खिलाड़ियों के जाने के बाद रहाणे से दो वनडे सीरीज में लगातार ओपनिंग कराई गई लेकिन, वे कुछ ख़ास नहीं कर सके. इसी बीच 2013 में इंग्लैंड में हुई चैंपियंस ट्रॉफी में कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ने एक नई सलामी जोड़ी के रूप में शिखर धवन और रोहित शर्मा को मौका दिया. चैंपियंस ट्रॉफी में ये दोनों छा गए, इस जोड़ी ने इस टूर्नामेंट के पांच मैचों 386 रन जोड़े और भारत पहली बार यह खिताब जीतने में सफल रहा. इसके बाद से बतौर सलामी बल्लेबाज ये दोनों ही भारतीय टीम मैनेजमेंट की पहली पसंद बने रहे. बल्लेबाजी क्रम में अगर तीसरे स्थान की बात करें तो यहां भी विराट कोहली अपना कब्जा जमा चुके थे. यानी घरेलू क्रिकेट में जिन दो स्थानों पर खेलते हुए रहाणे ने रन और लोकप्रियता दोनों बटोरी, राष्ट्रीय टीम में वे उनके लिए खाली नहीं थे.

अजिंक्य रहाणे को विदेशी धरती खूब रास आती है. वर्तमान भारतीय टीम में वे इकलौते ऐसे खिलाड़ी हैं जिसने ऐतिहासिक लॉर्ड्स के मैदान पर शतक लगाया है
अजिंक्य रहाणे को विदेशी धरती खूब रास आती है. वर्तमान भारतीय टीम में वे इकलौते ऐसे खिलाड़ी हैं जिसने ऐतिहासिक लॉर्ड्स के मैदान पर शतक लगाया है

हालांकि, इसके बाद भी रहाणे को टीम में रखना चयनकर्ताओं की मजबूरी थी क्योंकि वे जब भी राष्ट्रीय टीम से बाहर होते तो घरेलू क्रिकेट में शानदार प्रदर्शन करते. साथ ही इस दौरान वे आईपीएल में भी छाए रहते थे.

2015 विश्व कप और इसके बाद रहाणे को चौथे क्रम पर मौका दिया गया, लेकिन वे अपने प्रदर्शन में निरंतरता नहीं बनाए रख सके. हालांकि, इसका एक कारण यह भी था कि उन्हें ये मौके लगातार नहीं दिए गए थे. विश्व कप में चौथे क्रम पर रहाणे की बल्लेबाजी पर कप्तान धोनी का कहना था कि अजिंक्य रहाणे चौथे नंबर पर सही नहीं हैं क्योंकि यहां पर वे लगातार स्ट्राइक रोटेट नहीं कर पाते हैं और दवाब में आकर अपना विकेट दे बैठते हैं. लेकिन, धोनी के इतना कहने के बाद भी रहाणे को जिन मैचों में मौका दिया गया उसमें उन्हें मध्यक्रम पर ही भेजा गया. इस दौरान 2017 की चैंपियंस ट्रॉफी सहित कई ऐसे टूर्नामेंट भी रहे जिनमें रहाणे टीम के साथ तो थे लेकिन, वे अंतिम एकादश का हिस्सा नहीं रहे. इस दौरान चौथे नंबर पर कई अन्य बल्लेबाजों को भी मौका दिया गया लेकिन, वे भी कुछ खास नहीं कर सके.

लेकिन, 2017 चैम्पियंस ट्रॉफी के बाद हुए वेस्टइंडीज दौरे ने अजिंक्य रहाणे के लिए उम्मीदें जगा दीं. इस दौरे पर उनसे ओपनिंग कराई गई. और उन्होंने वेस्टइंडीज के खिलाफ पांच वनडे मैचों में एक शतक और तीन अर्धशतक के साथ कुल 336 रन बनाए. इसके बाद ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ घरेलू सीरीज में भी उनका शानदार प्रदर्शन जारी रहा. इस सीरीज के पांच मैचों में उन्होंने चार अर्धशतक ठोंके.

लेकिन, इसके बाद फिर परिस्थितियां उनके आड़े आ गईं. अपने इस शानदार प्रदर्शन के बाद भी रहाणे को आगे किसी वनडे सीरीज में बतौर सलामी बल्लेबाज मौका नहीं दिया गया. इस पर कप्तान विराट कोहली का कहना था कि सलामी बल्लेबाजी के लिए उनकी प्राथमिकता शिखर धवन और रोहित शर्मा हैं और रहाणे को बैकअप ओपनर के तौर पर रखा जाएगा.

इसके बाद हुई कुछ सीरीज में अजिंक्य रहाणे को किसी भी क्रम पर मौका नहीं दिया गया. इससे भी ज्यादा हैरानी तब हुई जब इस साल दक्षिण अफ्रीका दौरे पर अजिंक्य रहाणे को फिर चौथे क्रम पर खिलाया गया. हालांकि, अफ्रीका के खिलाफ पहले मैच में उन्होंने शानदार 79 रन बनाए लेकिन इसके बाद अन्य मैचों में वे कुछ ख़ास नहीं कर सके.

क्या अजिंक्य रहाणे वापसी कर सकते हैं?

क्रिकेट के ज्यादातर विश्लेषकों का मानना है कि अजिंक्य रहाणे में अपार क्षमताएं हैं. लेकिन, परिस्थितयों की वजह से उनके आगे असमंजस की स्थिति बनी रही. उनके सामने कभी यह साफ़ ही नहीं हो सका कि खेलना किस क्रम पर है. इन लोगों के मुताबिक रहाणे को ऊपरी क्रम में ज्यादा मौके न मिलने और कोई क्रम निश्चित न हो पाने की मार झेलनी पड़ी है. हालांकि, कुछ विश्लेषकों का मानना है कि अगर अभी भी रहाणे को बतौर सलामी बल्लेबाज मौका दिया जाए तो वे फिर अपनी क्षमताओं के साथ न्याय करने में सक्षम हैं.

लेकिन, इस सलाह से अलग हटकर अगर देखें तो इसके लिए शिखर धवन और रोहित शर्मा दोनों का कई सीरीज में लगातार विफल होना जरूरी हो जाएगा जोकि अब संभव नहीं लगता. हालांकि, एक स्थिति ऐसी है जिसमें रहाणे के लिए कम से कम अगले विश्वकप की 15 सदस्यीय टीम में वापसी की संभावना बन सकती है. कई लोगों का मानना है कि अगर रहाणे इंग्लैंड में होने वाली टेस्ट सीरीज में अपने पिछले प्रदर्शन को दोहराते हैं तो यह संदेश जाएगा कि उन्हें इंग्लैंड की धरती काफी रास आती है. और ऐसा होने पर चयनकर्ता उन्हें विश्वकप की 15 सदस्यीय टीम में चुनने पर विचार कर सकते हैं क्योंकि अगला विश्वकप भी इंग्लैंड में ही होना है.