कर्नाटक के सियासी घटनाक्रम से ताज़ातरीन दो ख़बरें निकलकर आई हैं. पहली ये कि कांग्रेस और जनता दल-सेकुलर (जद-एस) गठबंधन के पांच विधायक ‘लापता’ हैं. दूसरी- चुनाव में सबसे बड़ा दल बनकर उभरी भारतीय जनता पार्टी ने पूर्व मुख्यमंत्री बीएस येद्दियुरप्पा को विधायक दल का नेता चुन लिया है.

पहले पहली ख़बर. हिंदुस्तान टाइम्स के मुताबिक बेंगलुरु के एक होटल में बुधवार को जद-एस विधायक दल की बैठक हुई. इसमें दो विधायक राजा वेंकटप्पा नायक और वेंकट राव नादगौड़ा शामिल नहीं हुए. इन दोनों के अलावा कांग्रेस के विधायक- राजशेखर पाटिल, नागेंद्र और आनंद सिंह का भी अब तक कोई पता नहीं चला है. हालांकि कांग्रेस के नेता एमबी पाटिल ने कहा है, ‘हम सब साथ हैं. हमारे विधायकों के बारे में आ रही ख़बरें भ्रामक हैं. उल्टे भाजपा के छह विधायक हमारे संपर्क में हैं.’ जबकि समाचार एजेंसी एएनआई से कांग्रेस नेता डीके शिवकुमार ने कहा, ‘भाजपा हमारे विधायकों को ललचाने की कोशिश कर रही है. लेकिन हमारे पास उन्हें सुरक्षित रखने की पुख़्ता योजना है.’ जद-एस के नेता सर्वन्ना ने भी कहा, ‘मुझे नहीं पता वे (भाजपा) क्या पेशकश कर रहे हैं. लेकिन वे हमारे लोगों से संपर्क ज़रूर साध रहे हैं.’

उधर भाजपा के बासवराज बोम्मई (जनता पार्टी के पूर्व नेता और राज्य के मुख्यमंत्री रहे एसआर बोम्मई के पुत्र) का कहना है, ‘हमारी पार्टी किसी से संपर्क नहीं कर रही है. लेकिन राजनीति तो संभावनाओं की कला है.’ ग़ौरतलब है कि मंगलवार को आए चुनावी नतीज़ों में भाजपा को कर्नाटक में 104 सीटें मिली हैं जो बहुमत के आंकड़े 113 से नौ कम हैं. वहीं कांग्रेस को 78 और जद-एस को 38 (एक बहुजन समाज पार्टी की मिलाकर) सीटें हासिल हुई हैं. इन नतीज़ों के बाद भाजपा को सत्ता से बाहर रखने के लिए कांग्रेस-जद-एस ने हाथ मिला लिया है. दोनों पार्टियों ने जद-एस के एचडी कुमारस्वामी के नेतृत्व में गठबंधन सरकार बनाने का दावा पेश किया है.

वहीं भाजपा ने भी राज्यपाल वजूभाई वाला से मुलाकात कर सरकार बनाने का दावा किया है. पार्टी विधायकों ने बुधवार को बीएस येद्दियुरप्पा को औपचारिक तौर पर विधायक दल का नेता भी चुन लिया. इसके बाद येद्दियुरप्पा ने फिर राज्यपाल से मुलाकात की. उन्होंने उनसे आग्रह किया कि चूंकि भाजपा के पास सबसे ज़्यादा सीटें हैं इसलिए उसे सरकार बनाने के लिए पहले बुलाया जाना चाहिए. दूसरी तरफ जद-एस ने भी एचडी कुमारस्वामी को अपना नेता चुने जाने की औपचारिकता पूरी कर ली है. इस सबके बाद अब सभी की निग़ाहें राज्यपाल वजूभाई वाला के फ़ैसले की तरफ़ टिक गई हैं.