कर्नाटक के विधानसभा चुनाव में किसी भी एक दल को बहुमत न मिलने के बाद विधायकों की जोड़-तोड़ शुरू होने के संकेत मिलने लगे हैं. समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार बुधवार को जनता दल-सेक्युलर (जेडीएस) का विधायक दल का नेता चुने जाने के बाद एचडी कुमारस्वामी ने भाजपा पर अपने विधायकों को प्रलोभन देने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा, ‘जेडीए विधायकों को 100 करोड़ रुपये का प्रस्ताव दिया जा रहा है. यह काला धन कहां से आ रहा है? आयकर विभाग के अधिकारी कहां हैं?’

वहीं, भाजपा के ‘ऑपरेशन कमल’ के बारे में एचडी कुमारस्वामी ने कहा कि इसके सफल होने की बात भूल जाइए, क्योंकि भाजपा के विधायक भी हमारे साथ आने के लिए तैयार हैं. उन्होंने आगे कहा, ‘अगर भाजपा ने हमारा एक विधायक तोड़ा तो हम भी वैसा ही करेंगे और उसके दोगुने विधायक तोड़ लेंगे.’ उनके मुताबिक सरकार बनाने के लिए दलों को आमंत्रित करने को लेकर राज्यपाल के फैसले में देरी विधायकों की खरीद-फरोख्त को बढ़ावा दे रही है.

2008 में भी भाजपा को बहुमत से तीन सीटें कम मिली थी. लेकिन उसने कांग्रेस और जेडीएस के पांच विधायकों के इस्तीफे दिलाकर बहुमत के लिए जरूरी संख्या को अपने पाले में कर लिया था और सरकार बना ली थी. इसे ही ‘ऑपरेशन कमल’ कहा गया था.

कर्नाटक में कांग्रेस का बिना शर्त समर्थन स्वीकार कर चुके एचडी कुमारस्वामी ने भाजपा नेताओं से मुलाकात की खबरों को भी खारिज किया. भाजपा नेता प्रकाश जावड़ेकर से मुलाकात के सवाल पर उन्होंने कहा, ‘कौन जावड़ेकर? ये सज्जन कौन हैं? यह फर्जी खबरें हैं. मैंने किसी जावड़ेकर या किसी भाजपा नेता से मुलाकात नहीं की है.’ एचडी कुमारस्वामी ने आगे कहा कि भाजपा की उत्तर भारत से शुरू हुई अश्वमेध यात्रा के घोड़े कर्नाटक में रुक गए हैं, कर्नाटक की जनता का यह जनादेश उसकी अश्वमेध यात्रा रोकने के लिए है.

जेडीएस नेता एचडी कुमारस्वामी ने भाजपा के साथ गठबंधन कर सरकार बनाने के पुराने फैसले को अपने पिता के राजनीतिक जीवन पर काला धब्बा बताया. उन्होंने कहा, ‘मुझे दोनों तरफ से प्रस्ताव मिले थे. यह बात मैं हल्के में नहीं कह रहा. 2004 और 2005 में भाजपा के साथ जाने का मेरा फैसला मेरे पिता (पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा) के राजनीतिक जीवन पर काला धब्बा है. अब ईश्वर ने मुझे इस धब्बे को मिटाने का मौका दिया है, इसलिए मैं कांग्रेस के साथ जा रहा हूं.’

कर्नाटक में मंगलवार को आए चुनाव परिणाम में भाजपा को 104 सीटें मिली हैं जो बहुमत के लिए जरूरी 113 की संख्या से नौ कम है. वहीं, कांग्रेस को 78 और जेडीएस को 38 सीटें मिली हैं, जिसमें बसपा का एक विधायक शामिल है. हालांकि, अपना चुनावी गणित बिगड़ने के बाद कांग्रेस ने जेडीएस को समर्थन देने की घोषणा कर दी थी, जिसे उसने स्वीकार भी कर लिया था.