सुप्रीम कोर्ट ने कावेरी नदी जल बंटवारा योजना के मसौदे को अंतिम रूप देने के काम को टालने का अनुरोध ठुकरा दिया है. खबरों के अनुसार कर्नाटक ने राज्य में नई सरकार के गठन की प्रक्रिया का हवाला देकर इस मामले को टालने की जरूरत बताई. इस पर अदालत ने कहा कि नदी जल बंटवारा योजना का मसौदा बनाना केंद्र का विशेषाधिकार है, न कि राज्य सरकारों का. सुप्रीम कोर्ट ने इसके मसौदे में केंद्र को कुछ संशोधन करने का निर्देश देते हुए इसकी सुनवाई 17 मई तक के लिए टाल दी.

सुप्रीम कोर्ट ने इसी साल फरवरी में केंद्र को 29 मार्च तक कावेरी नदी जल प्रबंधन बोर्ड बनाने का निर्देश दिया था. बाद में यह समय सीमा तीन मई तक बढ़ा दी थी. लेकिन तीन मई को सुप्रीम कोर्ट को अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अन्य मंत्री कर्नाटक विधानसभा चुनाव में व्यस्त हैं, इसलिए कावेरी नदी जल बंटवारा योजना का मसौदा कैबिनेट के सामने नहीं पेश हो पाया है. इसके बाद चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा ने केंद्र से आठ मई को इस दिशा में उठाए गए कदमों की जानकारी देने का निर्देश दिया था.

वहीं, आठ मई को सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने जल संसाधन मंत्रालय के सचिव को 14 मई को जल बंटवारा योजना का मसौदा लेकर हाजिर होने का निर्देश दिया था. सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा था कि केंद्र द्वारा अब तक मसौदा तैयार न करना अदालत की गंभीर अवमानना है. हालांकि, 14 मई को केंद्र ने तमिलनाडु और कर्नाटक के बीच कावेरी नदी जल बंटवारा योजना का मसौदा पेश कर दिया था.