उम्र के 65 साल पूरे होते ही तिरुपति बालाजी मंदिर के पुजारी अब रिटायर हो जाया करेंगे. तिरुमला तिरुपति देवस्थानम (टीटीडी) ने यह फ़ैसला किया है. इसके साथ ही टीटीडी ने मंदिर के मुख्य पुजारी (अर्चक) डॉक्टर एवी रामना दीक्षितुलु को भी सेवानिवृत्ति का आदेश थमा दिया है. उनकी उम्र से 65 साल से ज़्यादा हो चुकी है.

वैसे ख़बराें की मानें तो टीटीडी के इस फ़ैसले को डॉक्टर दीक्षितुलु के ख़िलाफ़ प्रतिक्रिया वाली कार्रवाई अधिक माना जा रहा है. बताते चलें कि दीक्षितुलु ने चेन्नई में इसी सप्ताह पत्रकार वार्ता की थी. इसमें उन्होंने बताया था, ‘टीटीडी के प्रशासक मंदिर की पवित्रता और उसका मूल लोकाचार बरक़रार नहीं रख पा रहे हैं.’ उन्होंने संदेह ज़ताया था कि मंदिर के कोष का पैसा कहीं और जा रहा है. उनके मुताबिक, ‘भगवान के कई पुराने आभूषणों का कुछ अता-पता नहीं है. पहले 1996 तक जब पुजारी भगवान के आभूषणों और कोष के संरक्षक थे ताे पूरा रिकॉर्ड दुरुस्त रखा जाता था. लेकिन पिछले 22 सालों में जब से टीटीडी के ज़रिए आंध्र सरकार के पास यह ज़िम्मेदारी आई है, कोई रिकॉर्ड नहीं रखा जा रहा है. नए-पुराने आभूषणों की गिनती एक बार भी नहीं हुई.’

उन्होंने इसके साथ ही मंदिर में आने वाले चढ़ावे आदि का खुला ऑडिट कराने की मांग की थी. साथ ही यह अपेक्षा की थी कि पारदर्शिता क़ायम करने के लिए डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जाए. उन्होंने टीटीडी की जगह मंदिर का कामकाज देखने के लिए एक विशेषज्ञ पैनल बनाने और भगवान के ‘लापता आभूषणों’ की पड़ताल के लिए सीबीआई से जांच कराने की भी केंद्र सरकार से मांग की थी. ख़बरों के मुताबिक इन आरोपों के सामने आने के बाद बुधवार को टीटीडी की आपात बैठक बुलाई गई. इसमें पुजारियों के रिटायरमेंट की आयु सीमा तय कर दी गई. साथ में यह भी तय किया गया कि पुजारियों के ‘पुत्रों को ही नियमों के मुताबिक मंदिर में पूजा-अर्चा के रोजगार में रखा जाए.’ इसके अलावा दीक्षितुलु को कारण बताओ नोटिस जारी किए जाने का भी फैसला हुआ.