झारखंड के माओवादी समूह और मणिपुर के उग्रवादी संगठन दिल्ली में बड़े पैमाने पर नशे का कारोबार कर रहे हैं. टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक ये संगठन पंजाब में भी नशीले पदार्थ सप्लाई कर रहे हैं. खबरों के मुताबिक यह जानकारी तब मिली जब दिल्ली पुलिस ने दिल्ली-पंजाब सीमा पर तीन लोगों को पांच किलो हेरोइन के साथ गिरफ्तार किया. प्राप्त जानकारी के मुताबिक इसकी कीमत 20 करोड़ रुपये है. पुलिस ने बताया कि यह नशीला पदार्थ कोरियर कंपनियों के जरिये दूसरे देशों में भी पहुंचाया जा रहा है.

रिपोर्ट के मुताबिक फरवरी के बाद से यह दूसरा मौका है जब मणिपुर और झारखंड से सप्लाई हो रहे किसी नशीले पदार्थ को सीज किया गया है. दोनों ही मौकों पर पाया गया कि मणिपुर और झारखंड से भेजी गई हेरोइन पहले उत्तर प्रदेश के बरेली में पहुंचती है. यहां इसे नशा करने के लायक बनाया जाता है. इसके लिए बाकायदा अस्थायी लैब का इंतजाम रहता है. बाद में हेरोइन को दिल्ली लाया जाता है. पुलिस का कहना है कि युवाओं को कोकीन बहुत मुश्किल से मिलती है और यह काफी महंगी भी है, इसलिए उन्होंने हेरोइन लेना शुरू कर दिया है. इस साल दिल्ली पुलिस अब तक 58 किलो अच्छी गुणवत्ता वाली हेरोइन बरामद कर चुकी है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी कीमत 230 करोड़ रुपये है.

पुलिस ने बताया कि अफगानिस्तान-पाकिस्तान के रास्ते हेरोइन मणिपुर और झारखंड पहुंचती है. इन दोनों राज्यों को हेरोइन की सप्लाई का केंद्र बताते हुए स्पेशल सेल के डीसीपी संजीव यादव ने कहा, ‘झारखंड में कुछ इलाके हैं, खास तौर पर चतरा जिले जैसे नक्सल प्रभावित इलाके और मणिपुर के पहाड़ी क्षेत्र जहां लोग अवैध रूप से अफीम उगाते हैं. वे इसे हेरोइन में बदल कर दिल्ली और उत्तर प्रदेश के लिए भेज देते हैं.’

पुलिस ने हेरोइन सप्लाई कर रहे जिन तीन लोगों को गिरफ्तार किया है उनके नाम शकील (30), इरशाद (23) और जितेंदर यादव (23) हैं. शकील और इरशाद उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर से हैं. वहीं, जितेंदर झारखंड का रहने वाला है. पुलिस ने बताया कि इरशाद और शकील को झारखंड में किसी श्रवण नाम के व्यक्ति ने हेरोइन दी थी. वे इम्फाल में किसी नजीर नाम के व्यक्ति से संपर्क में थे. बताया जा रहा है कि इन सभी लोगों के संबंध विद्रोही समूहों से हैं. पुलिस उनसे पूछताछ कर पता लगा रही है कि दिल्ली और अन्य राज्यों में उनके और कितने सहयोगी हैं.