अब तक ख़बर थी कि केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार लोक सभा और विधानसभाओं के चुनाव ही एक साथ कराने की तैयारी कर रही है. लेकिन अब इस ख़बर में थोड़ा संशोधन हुआ है. अब बताया जा रहा है कि तैयारी सिर्फ़ लोक सभा और विधानसभाओं के ही नहीं है बल्कि पंचायतों और नगरीय निकायों के चुनाव भी साथ कराने की है.

द इकॉनॉमिक टाइम्स के मुताबिक सरकार ने अब पूरे देश में एक जैसी मतदाता सूचियां तैयार करने की दिशा में कदम बढ़ाया है. बताया जाता है कि विधि आयोग ने यह मसला भारत निर्वाचन आयोग के सामने उठाया है. दोनों आयोगों के प्रतिनिधियों की इस बाबत बुधवार को बैठक हुई थी. इसमें विधि आयोग के प्रतिनिधियों ने जानना चाहा कि पंचायत से लेकर लोक सभा चुनाव तक के लिए एक जैसी मतदाता सूचियां क्यों नहीं तैयार की जा सकतीं. इसके ज़वाब में चुनाव आयोग ने बताया कि इस दिशा में कुछ तकनीकी दिक्क़तें हैं.

यहां बताते चलें कि फिलहाल लोक सभा और विधानसभा चुनावों के लिए मतदाता सूचियां तैयार करने की ज़िम्मेदारी भारत निर्वाचन आयोग की होती है क्योंकि ये चुनाव वही कराता है. जबकि पंचायत और नगरीय निकायों के चुनाव चूंकि राज्य निर्वाचन आयोग कराते हैं इसलिए उनसे जुड़ी मतदाता सूचियां भी वे ही अपने स्तर पर तैयार कराते हैं. हालांकि वे कई बार लोक सभा और विधानसभा की मतदाता सूचियों को ही इस्तेमाल कर लेते हैं लेकिन फिर भी इनमें परिवर्तन करना या इन्हें नए सिरे से बनाने का फ़ैसला उनका ही होता है.

वैसे सूत्रों की मानें तो विधि आयोग ने एक जैसी मतदाता सूचियां बनाने का मसला चुनाव आयोग के सामने प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) की इच्छा के मद्देनज़र ही उठाया है. सभी चुनाव एक साथ कराने के मुद्दे को भारतीय जनता पार्टी का भी पूरा समर्थन है. बल्कि मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में भाजपा की सरकारों ने तो इस दिशा में विचार के लिए अपने स्तर पर समितियां भी गठित कर दी हैं. इनमें उत्तर प्रदेश सरकार की समिति ख़ास तौर पर एक जैसी मतदाता सूचियां बनाने का मसला भी देख रही है.