कर्नाटक के राज्यपाल वजूभाई वाला के एक और फैसले को लेकर विवाद शुरू हो गया है. समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार विधानसभा के सबसे वरिष्ठ सदस्य को प्रोटेम स्पीकर (अस्थायी विधानसभा अध्यक्ष) नियुक्त करने की परंपरा से हटते हुए उन्होंने भाजपा विधायक केजी बोपैया को यह जिम्मेदारी सौंपी है. लेकिन कांग्रेस ने इस पर ऐतराज जताया है. पार्टी के वरिष्ठ नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा, ‘आदर्श रूप में विधानसभा का सबसे वरिष्ठ सदस्य ही प्रोटेम स्पीकर नियुक्त किया जाता है.’ अभिषेक मनु सिंघवी ने आगे कहा, ‘भाजपा विश्वास मत के लिए गुप्त मतपत्र का इस्तेमाल करना चाहती है. लेकिन सुप्रीम कोर्ट के आदेश में साफ-साफ लिखा है कि इसके लिए गुप्त मतपत्र का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा.’ वहीं कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने प्रोटेम स्पीकर को लेकर राज्यपाल के फैसले के खिलाफ अदालत जाने का विकल्प खुला रखा है. विधानसभा में बहुमत परीक्षण में प्रोटेम स्पीकर की भूमिका काफी अहम होती है.

उधर केंद्रीय मंत्री और कर्नाटक में भाजपा के प्रभारी प्रकाश जावड़ेकर ने कांग्रेस की आपत्तियों को फर्जी बताया है. ट्विटर पर उन्होंने लिखा, ‘केजी बोपैया को 2008 में तत्कालीन राज्यपाल ने प्रोटेम स्पीकर बनाया था, तब वे आज से 10 साल छोटे थे.’ प्रकाश जावड़ेकर के मुताबिक विधायक केजी बोपैया को प्रोटेम स्पीकर बनाया जाना कानूनन सही है. द इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक कर्नाटक विधानसभा में कांग्रेस के रघुनाथ विश्वनाथ देशपांडे सबसे वरिष्ठ विधायक हैं. वे आठवीं बार विधानसभा पहुंचे हैं, जबकि केजी बोपैया चौथी बार विधायक बने हैं. वरिष्ठता की वजह से ही मीडिया में विधायक रघुनाथ विश्वनाथ देशपांडे को प्रोटेम स्पीकर बनाए जाने की अटकलें सामने आई थीं.

शुक्रवार को कांग्रेस और जनता दल-सेक्युलर (जेडीएस) की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने मुख्यमंत्री बीएस येद्दियुरप्पा को शनिवार चार बजे सदन में बहुमत साबित करने का आदेश दिया था. इसके अलावा इसके लिए प्रोटेम स्पीकर नियुक्त करने का भी निर्देश दिया था. इससे पहले राज्यपाल वजूभाई वाला ने मुख्यमंत्री बीएस येद्दियुरप्पा को बहुमत साबित करने के लिए 15 दिन का समय दिया था.