आलिया भट्‌ट के आला अभिनय से सजी हिंदी फिल्म ‘राज़ी’ जिस असल भारतीय क़िरदार की ज़िदगी पर आधारित है उनकी पहचान जल्द ही सबके सामने लाई जा सकती है. भारतीय ख़ुफ़िया एजेंसी ‘रॉ’ (रिसर्च एंड एनालिसिस विंग) की जासूस इस किरदार के जीवन पर लेखक हरिंदर सिक्का ने ‘कॉलिंग सहमत’ के नाम से उपन्यास लिखा है. अपनी उपन्यास और इस पर बनी फिल्म ‘राज़ी’ में अब तक सहमत का असली नाम या तस्वीर उजागर नहीं की गई थी. लेकिन अब सिक्का की योजना है कि जून में इस ‘गुमनाम भारतीय नायिका’ की असली तस्वीरों की प्रदर्शनी लगाई जाए. हालांकि जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक़ अब्दुल्ला ने सिक्का से ऐसा न करने का आग्रह किया है.

समाचार वेबसाइट ‘द क्विंट’ से बातचीत में सिक्का ने बताया कि उन्हें सहमत के बारे में कारगिल युद्ध के दौरान पता चला था. इसके बाद उन्होंने उनकी ज़िंदगी के तमाम पहलुओं की पड़ताल में आठ साल का वक़्त लगाया. तब कहीं वे उनकी ज़िंदगी पर उपन्यास लिख पाए. इस दौरान वे सहमत से भी मिले जो पंजाब के मलेरकोटला में रहती थीं. सिक्का के मुताबिक, ‘मैंने उनसे पूछा- आप यहां क्याें रहती हैं? तो उन्होंने बताया- यहां अब्दुल रहता था. अब्दुल कौन था? -उस परिवार का सबसे वफ़ादार नौकर. अब्दुल को क्या हुआ था? -उसे मैंने ट्रक से कुचल दिया था.’

यहां बताना ज़रूरी है कि श्रीनगर की रहने वाली हिंदुस्तानी जासूस सहमत की शादी पाकिस्तानी सेना के एक बड़े अफ़सर के परिवार में कराई गई थी. वहां से वे रॉ के लिए ख़ुफ़िया सूचनाएं भारत भेजती थीं. यह 1970-71 के दौर की बात है. उसी दौरान उन्हें अपनी ससुराल के वफ़ादार नौकर अब्दुल और पति के बड़े भाई को मारना पड़ा था क्योंकि इन लोगों के सामने उनकी पहचान उजागर हाे गई थी.

सहमत का पिछले महीने निधन हो चुका है, इसलिए प्रदर्शनी

सिक्का बताते हैं कि पिछले महीने सहमत का निधन हो चुका है. लिहाज़ा अब वे उनकी तस्वीरों की प्रदर्शनी लगाने की योजना बना रहे हैं ताकि दुनिया जान सके कि वह बहादुर और बेहद ख़ूबसूरत हिंदुस्तानी जासूस कौन थी. हालांकि फारूक़ अब्दुल्ला ने सिक्का से ऐसा न करने का आग्रह किया है. इंडिया टुडे के मुताबिक अब्दुल्ल ने सिक्का को इसी 16 मई को पत्र लिखकर याद दिलाया है कि उन्होंने उनसे वादा किया था कि वे सहमत की पहचान उजागर नहीं करेंगे.

सूत्र बताते हैं कि 2008 में उपन्यास प्रकाशित होने से कुछ समय पहले सिक्का ने अब्दुल्ला को इसके मज़मून के बारे बताया था. तब अब्दुल्ला ने उनसे आग्रह किया था कि सहमत की पहचान उजागर न की जाए. इससे उन्हें और उनके परिवार की सुरक्षा को ख़तरा हो सकता है. इसके बाद सिक्का ने उपन्यास में उनका नाम बदलकर ‘सहमत’ कर दिया था.

हालांकि अब्दुल्ला की दलील अब भी यही है कि सहमत की पहचान उजागर होने से उनके परिवार के बाकी सदस्यों का भी पता लगाना मुश्किल नहीं होगा. इससे उनकी ज़िंदगी को ख़तरा हाे सकता है. लेकिन सिक्का की मानें तो सहमत के पुत्र ने उनकी तस्वीरें सार्वजनिक करने के लिए अपनी मंज़ूरी दे दी है. अलबत्ता उन्होंने यह भी जोड़ा, ‘मैं एक बार फिर सिक्का के परिवार से मिलूंगा. उनसे राय लूंगा. इसके बाद ही सहमत की तस्वीरें सार्वजनिक करने या न करने पर फ़ैसला किया जाएगा.’