कर्नाटक के मुख्यमंत्री बीएस येद्दियुरप्पा ने इस्तीफा दे दिया है. उन्हें आज विधानसभा में बहुमत साबित करना था, लेकिन इससे पहले ही उन्होंने इस्तीफा देने का ऐलान किया. विधानसभा में अपने भाषण में बीएस येद्दियुरप्पा ने कहा कि कर्नाटक के मतदाताओं ने भाजपा को सबसे बड़ी पार्टी बनाया था, लेकिन विरोधियों ने अवसरवादी गठबंधन बना लिया. उनका यह भी कहना था कि उन्होंने किसानों सहित राज्य के तमाम लोगों की समस्याएं काफी करीब से देखी हैं. बीएस येद्दियुरप्पा ने आगे कहा कि वे आखिरी सांस तक कर्नाटक के लोगों की सेवा करते रहेंगे. उन्होंंने कहा कि वे अब सीधे राजभवन जाकर राज्यपाल को इस्तीफा सौंपने जा रहे हैं. भाषण के दौरान बीएस येद्दियुरप्पा कई बार भावुक भी हो गए.

कर्नाटक में हाल में हुए विधानसभा चुनावों में भाजपा को 104 सीटें मिली थीं जो बहुमत के आंकड़े से आठ कम हैं. उधर, चुनाव अलग-अलग लड़े कांग्रेस और जेडीएस ने नतीजों के बाद हाथ मिलाते हुए सरकार बनाने का दावा किया था. उनके पास क्रमश: 78 और 37 सीटें हैं. हालांकि राज्यपाल वजूभाई वाला ने बीएस येद्दियुरप्पा को पहले सरकार बनाने का न्योता दिया था. राज्यपाल ने भाजपा को बहुमत साबित करने के लिए 15 दिन का समय दिया था, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने कांग्रेस-जेडीएस की आपत्ति पर यह अवधि घटा दी.

कर्नाटक में भाजपा सरकार बने रहना पार्टी के लिए तो महत्वपूर्ण था ही, लेकिन खुद 75 पार के बीएस येद्दियुरप्पा के लिए यह कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण था. इसलिए बहुत से लोग मान रहे हैं कि अब उनके राजनीतिक जीवन के पटाक्षेप की शुरुआत भी होने जा रही है. बीएस येद्दियुरप्पा के मुख्यमंत्री बनने के बाद पार्टी के एक राष्ट्रीय पदाधिकारी का कहना था, ‘उनके पास पार्टी में कम से कम कर्नाटक के अंदर खुद को सबसे उपयोगी साबित करने का एक और मौका है. अगर वे कांग्रेस के लिंगायत विधायकों को विधानसभा में वोटिंग न करने के लिए मना लेते हैं और अपनी सरकार बचा लेते हैं तब तो वे निश्चित तौर पर कर्नाटक भाजपा के सबसे ताकतवर नेता बने रहेंगे. लेकिन अगर ऐसा नहीं होता है और कर्नाटक में कांग्रेस और जेडीएस की सरकार बन जाती है तो फिर कर्नाटक के लिए भाजपा की जो भावी रणनीति होगी उसमें येद्दियुरप्पा की कोई खास भूमिका नहीं रहेगी.’