कर्नाटक के मुख्यमंत्री पद से भारतीय जनता पार्टी के नेता बीएस येदियुरप्पा के इस्तीफे के बाद कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने जो प्रेस वार्ता की, उसमें उन्होंने भाजपा, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह पर जमकर हमले किए. येदियुरप्पा सरकार के गिर जाने के बाद कांग्रेस और जनता दल सेक्युलर की सरकार का रास्ता साफ होने को उन्होंने लोकतंत्र और संवैधानिक संस्थानों की जीत कहा.

राहुल गांधी पर अक्सर कई बातों को लेकर सवाल उठाया जाता है. उनकी क्षमताओं पर कई तरह के सवाल खड़े किए जाते हैं. लेकिन इस प्रेस वार्ता के दौरान वे और उनके जरिये उनकी पार्टी कई स्तरों पर बेहद प्रभावी दिखे. ऐसी तीन प्रमुख बातें:

मुद्दों की पकड़

राहुल गांधी ने प्रेस वार्ता की शुरुआत इस बात से की कि कर्नाटक विधानसभा में जब येदियुरप्पा ने इस्तीफा देने की घोषणा की और इसके बाद जब राष्ट्रगान बजा तो उसके खत्म होने का इंतजार न तो येद्दियुरप्पा ने किया, न ही भाजपा विधायकों ने और न ही प्रोटेम स्पीकर ने. उन्होंने कहा कि इससे अंदाजा लगा सकते हैं कि भाजपा राष्ट्रगान और विभिन्न संस्थाओं का कितना सम्मान करती है.

भाजपा खुद को राष्ट्रवादी पार्टी कहती है. राष्ट्रवाद के मुद्दे पर वह दूसरी पार्टियों को घेरने की कोशिश करती है. लेकिन राहुल गांधी ने बड़ी चतुराई से राष्ट्रगान का मुद्दा उठाकर भाजपा को उसके द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले प्रतीकों के जरिए ही सवालों के घेरे में लाने का काम किया. माना जा रहा है कि यह मुद्दा उठाकर राहुल गांधी ने आम लोगों को अपने साथ लाने की कोशिश की है. साथ ही उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह की किसी भी व्यक्ति या संस्था की परवाह न करने वाली छवि को और मजबूत करने पर भी जोर दिया. ऐसे ही राहुल गांधी ने राज्यपाल के मुद्दे को भी व्यापक मुद्दा बनाते हुए कर्नाटक के राज्यपाल को तो कुछ नहीं कहा बल्कि इसके लिए भाजपा के शीर्ष नेतृत्व को जिम्मेदार ठहराया. उन्होंने कहा कि अभी जो स्थिति है, उसमें कोई भी राज्यपाल ऐसा ही करेगा.

विपक्ष को एकजुट करने की पहल

इस प्रेस वार्ता में राहुल गांधी ने खुद स्पष्ट तौर पर यह संकेत दिया कि कर्नाटक की कामयाबी विपक्ष को एकजुट करने का काम करेगी और इसकी पहल वे खुद करेंगे. दरअसल, भाजपा ने कर्नाटक में सरकार बनाने की बेसब्री में वहां राज्यपाल के जरिए जो कराया, उससे पूरे विपक्ष को गोलबंद होने का एक बड़ा अवसर मिल गया है. आज पूरा विपक्ष अपने मतभेदों को भूलकर एक स्वर में बोलने लगा है.

राहुल गांधी इसी स्थिति का इस्तेमाल अगले लोकसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए भाजपा के खिलाफ करने की तैयारी में दिखे. उन पर जो आरोप लगता था कि वे मौका मिलने पर नेतृत्व नहीं देते दिखते, इस प्रेस कॉन्फरेंस और इसके जरिये विपक्षी एकता की बात उठाकर वे उस धारणा को तोड़ते नजर आए. इस प्रेस वार्ता में राहुल गांधी जिस तरह से और जो बोले, वह विपक्ष को एकजुट करने के लिए तैयार नेता के बोलने जैसा था.

सीधे हमले की रणनीति

जिस दिन राहुल गांधी ने कांग्रेस अध्यक्ष का पद संभाला था, उस दिन उनकी मां और अध्यक्षता छोड़ रही सोनिया गांधी ने कहा था कि भारत के हाल के राजनीतिक इतिहास में जितने निजी हमले राहुल गांधी को झेलने पड़े हैं, उतने किसी और नेता ने नहीं झेले हैं. राहुल गांधी की पहचान सीधा हमला करने वाले नेता की नहीं रही है. लेकिन कर्नाटक में येद्दियुरप्पा के इस्थीफे के बाद अपनी प्रेस वार्ता में वे सीधा हमला बोलते नजर आए.

उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बारे में कहा कि विधायकों की खरीद-फरोख्त की कोशिश उनकी सहमति से हो रही थी. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ही भ्रष्टाचार हैं. भाजपा अध्यक्ष अमित शाह को उन्होंने ‘हत्या का आरोपी’ कहा. भाजपा अब तक राजनीतिक विमर्श नरेंद्र मोदी बनाम राहुल गांधी के थीम पर चलाती रही है. कांग्रेस अध्यक्ष इसमें नया आयाम जोड़ते हुए नरेंद्र मोदी और अमित शाह की जोड़ी पर सीधा हमला बोल रहे हैं. यह राहुल गांधी और उनकी कांग्रेस का एक नया रूप है.

न सिर्फ भाजपा बल्कि प्रेस का सामना करने के लिए भी तैयार

आम तौर पर माना यह जाता है कि नरेंद्र मोदी एक बहुत अच्छे वक्ता हैं और राहुल इस विभाग में उनके सामने कहीं नहीं टिकते. इसके अलावा मोदी और शाह के समय की भाजपा चुनाव और उसके आगे-पीछे के प्रबंधन में कांग्रेस सहित देश की सभी राष्ट्रीय और क्षेत्रीय पार्टियों से मीलों आगे है. लेकिन राहुल गांधी की प्रेस कॉन्फरेंस में उनमें कर्नाटक में कांग्रेस के भाजपा पर उसके ही खेल में जीत दर्ज करने का आत्मविश्वास साफ दिख रहा था. नरेंद्र मोदी के उलट जो न के बराबर और सिर्फ बेहद चुने हुए लोगों को ही साक्षात्कार देते हैं, जो कभी प्रेस वार्ता नहीं करते, इस प्रेस वार्ता में राहुल गांधी बेहद सहजता से पत्रकारों के सभी तरह के सवालों का जवाब पूरी कुशलता से देते नजर आ रहे थे.