पाकिस्तान ने भारत पर एक बार फिर सिंधु जल समझौते के उल्लंघन का आरोप लगाया है. उसने यह आरोप जम्मू-कश्मीर में किशनगंगा पनबिजली परियोजना का उद्घाटन किए जाने के एक दिन बाद लगाया. द टाइम्स आॅफ इंडिया के मुताबिक संयुक्त राष्ट्र संघ (यूएन) में पाकिस्तानी दूत एजाज अहमद चौधरी ने रविवार को कहा कि पाकिस्तान के अटॉर्नी जनरल (एजीपी) के नेतृत्व में चार सदस्यों का एक प्रतिनिधिमंडल वॉशिंगटन पहुंच गया है. यह प्रतिनिधिमंडल किशनगंगा परियोजना और दोनों देशों के बीच हुई जल संधि के मुद्दे पर विश्व बैंक के साथ बैठक करेगा.
किशनगंगगा पनबिजली परियोजना का उद्घाटन बीते हफ्ते शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया था. इस परियोजना के उद्घाटन से एक दिन पहले शुक्रवार को भी पाकिस्तान ने इसको लेकर विरोध जताया था. उसका तर्क था कि इस परियोजना से सिंधु जल संधि के तहत उसको मिलने वाले पानी की आपूर्ति प्रभावित होगी. उधर, भारत का कहना है कि इस बिजली परियोजना का निर्माण संधि की तय शर्तों के तहत किया गया है.
उत्तरी कश्मीर के बांदीपोरा इलाके में स्थित 330 मेगावॉट की इस बिजली परियोजना का निर्माण 2007 में शुरू किया गया था. मई 2010 में पाकिस्तान ने इस परियोजना को अंतरराष्ट्रीय जल संधि का उल्लंघन बताते हुए आपत्ति जताई थी. इसके बाद वह इस मामले को अंतरराष्ट्रीय न्यायालय ले गया था. साल 2013 में अंतरराष्ट्रीय न्यायालय ने भारत को इस परियोजना के निर्माण की मंजूरी दे दी थी. साथ ही, उसने भारत को अंतरराष्ट्रीय जल संधि के मुताबिक नदी में न्यूनतम जल प्रवाह बनाए रखने का आदेश भी दिया था.
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