पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने उम्मीद जताई है कि तेल के दाम करने के लिए केंद्र सरकार उत्पाद शुल्क (एक्साइज ड्यूटी) में कटौती कर सकती है. रविवार को धर्मेंद्र प्रधान भुवनेश्वर में थे. यहां उन्होंने पत्रकारों से बातचीत में कहा, ‘तेल के दामों को लेकर सरकार संवेदनशील है. कई विकल्पों पर विचार किया जा रहा है. मुझे उम्मीद है कि जल्द ही कोई समाधान निकलेगा.’

केंद्रीय मंत्री ने पेट्रोल-डीजल की कीमतों में लगातार हो रही बढ़ोतरी के लिए तेल उत्पादक देशों को जिम्मेदार बताया. उन्होंने कहा कि तेल निर्यात करने वाले देशों के संगठन (ओपीईसी) ने तेल उत्पादन कम करने का एकतरफा फैसला लिया. उन्होंने कहा कि वेनेजुएला में राजनीतिक अस्थिरता और अमेरिका द्वारा ईरान पर प्रतिबंध लगाने की संभावना भी तेल के दामों में बढ़ोतरी के लिए जिम्मेदार है.

धर्मेंद्र प्रधान अब तक तेल के दामों में लगने वाले शुल्क में कटौती करने की बात को यह कह कर नकार रहे थे कि कीमतों में हुई बढ़ोतरी अस्थायी है. वे यह तर्क देते रहे कि राज्य वैट में कटौती करें और तेल के दामों को जीएसटी सिस्टम के तहत लाया जाए. लेकिन अब तक हुआ यह है कि पेट्रोल-डीजल की कीमतों में लगने वाले शुल्क भी बढ़े हैं और उन्हें जीएसटी के तहत लाने के लिए सरकार की तरफ से कोई कदम नहीं उठाया गया है. नवंबर 2014 से लेकर जनवरी 2016 के बीच केंद्र सरकार ने एक्साइज ड्यूटी नौ बार बढ़ाई थी, जबकि उसमें कटौती केवल एक बार की गई. अक्टूबर 2017 में इसमें दो रुपये की कटौती की गई थी.

इधर, बीते तीन दिनों से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत 80 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बनी हुई है. वहीं, तेल कंपनियों की ओर से आज सुबह छह बजे जारी रेट लिस्ट के मुताबिक दिल्ली में पेट्रोल 33 पैसे महंगा हो गया है. रविवार को यह 76.24 रुपये प्रति लीटर था, अब यह 76.57 रुपये प्रति लीटर मिल रहा है जो इसका अब तक का सबसे ऊंचा स्तर है. डीजल भी अब तक के अपने सबसे महंगे स्तर पर पहुंच गया है. सोमवार सुबह इसमें 25 पैसे की बढ़ोतरी हुई है. दिल्ली में अब डीजल 67.82 रुपये प्रति लीटर में मिल रहा है. देश के अलग-अलग राज्यों में स्थानीय सेल्स टैक्स और वैट जैसे शुल्कों की कीमत अलग-अलग होने के चलते पेट्रोल और डीजल की कीमत भी अलग-अलग होती है.