पिछले वित्तीय वर्ष की चौथी तिमाही (जनवरी-मार्च) में देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) को 7,718 करोड़ रुपये का घाटा हुआ है. यह घाटा कुछ समय पहले एक सर्वेक्षण के जरिये लगाए गए अनुमान से कहीं ज्यादा है. इस सर्वेक्षण में 16 विशेषज्ञों के हवाले से रॉयटर्स ने बताया था कि चौथी तिमाही में एसबीआई का घाटा 1,285 करोड़ रुपये रह सकता है. लेकिन ताजा आंकड़े उससे लगभग सात गुना ज्यादा घाटा दिखा रहे हैं. पिछले साल इसी अवधि के दौरान बैंक को 2,815 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ हुआ था.

इतना ज्यादा घाटा होने की एक प्रमुख वजह फंसे हुए कर्ज का बढ़ता आंकड़ा माना जा रहा है. टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक चौथी तिमाही में देनदारों द्वारा एसबीआई का नहीं चुकाया गया कर्ज या एनपीए 10.91 प्रतिशत हो गया. एक साल पहले तक यह 6.9 फीसदी हुआ करता था.

देश के बैंकिंग क्षेत्र से लगातार बुरी खबरें आ रही हैं. कुछ दिन पहले देश के दूसरे सबसे बड़े सरकारी बैंक पंजाब नेशनल बैंक ने भी बताया था कि वित्त वर्ष 2017-18 की चौथी तिमाही उसे 13,417 करोड़ रुपये का घाटा हुआ है. इससे पिछले साल इसी अवधि में पीएनबी को 261.9 करोड़ रुपये का मुनाफा हुआ था.