पाकिस्तान की तरफ से हो रही गोलाबारी ने जम्मू-कश्मीर सीमा के कई गांवों को वीरान कर दिया है. सीमा पार से हो रही फायरिंग में मारे जाने के डर से लोग अपने घर छोड़ कर चले गए हैं. हिंदुस्तान टाइम्स के मुताबिक सीमा के नजदीकी गांवों के करीब एक लाख लोगों ने अपने घर छोड़ दिए हैं. खबर के मुताबिक गोलाबारी के दौरान उनके घरों को हुए नुकसान को साफ देखा जा सकता है.

सीमा के पास बसा ऐसा ही एक गांव है केसो. यहां 1,500 लोग रहते थे. गोलाबारी की वजह से यहां की महिलाएं और बच्चे राहत शिविरों में चले गए हैं. पुरुष शाम के समय शिविर में पहुंचते हैं. केसो में रहने वालीं सोनम कुंदल बताती हैं कि बीते मंगलवार की शाम को हुई गोलाबारी में उनके पिता, मां और भाई घायल हो गए थे. वे सभी जम्मू के सरकारी अस्पताल में हैं. सोनम की किस्मत अच्छी थी कि वे इस हमले में बच गईं. अब वे अपनी एक रिश्तेदार के यहां जाने की तैयारी कर रही हैं. सोनम की तरह जम्मू, कठुआ और सांबा जिले के कई गांवों के लोगों को मजबूरन अपने घर छोड़ने पड़े हैं. इनमें से कई राहत शिविरों में रह रहे हैं.

सीमा से सबसे नजदीक का गांव नांगा तो भुतहा बन चुका है. यहां रहने वाले 53 साल के अशोक कुमार पाकिस्तान पर गुस्सा निकालते हुए कहते हैं, ‘वे रमजान के महीने में निर्दोष लोगों को मार रहे हैं. वे हमारा खून बहा रहे हैं तो हम शांति की बात कैसे कर सकते हैं.’ पाकिस्तान के अलावा लोग सरकार को लेकर भी गुस्से में हैं. उनका कहना है कि गोलाबारी से बचने के लिए सरकार ने उन्हें कोई सुरक्षित जगह मुहैया नहीं कराई है. वे खुद ही गोलाबारी से बचने की कोशिश कर रहे हैं.

पिछले कुछ दिनों से पाकिस्तानी सेना बीएसएफ की चौकियों समेत सीमा के पास के गांवों को भी निशाना बना रही है. पिछले एक हफ्ते के दौरान अकेले रामगढ़ गांव में हुई गोलाबारी में चार लोगों की मौत हो चुकी है जबकि 25 लोग घायल हो गए हैं. बीएसएफ के दो जवानों को भी अपनी जान गंवानी पड़ी है.