उत्तर प्रदेश में एक बार फिर शहरों का नाम बदलने की राजनीति शुरू हो सकती है. राज्य की आदित्यनाथ सरकार ऐतिहासिक और धार्मिक शहर इलाहाबाद का नाम बदलने जा रही है. समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार इलाहाबाद का नाम प्रयागराज करने पर सरकार अगले साल होने जा रहे अर्द्ध कुंभ से पहले फैसला कर सकती है. इसकी पुष्टि करते हुए उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि इलाहाबाद की पहचान प्रयाग की वजह से है, इसलिए सरकार ने इसका नाम बदलने का फैसला किया है.

मीडिया में आई खबरों के मुताबिक 2019 के अर्द्ध कुंभ के लिए जारी बैनरों में भी इलाहाबाद की जगह प्रयागराज लिखा गया है. इसके अलावा कुंभ के लिए गठित प्राधिकरण के नाम में भी प्रयागराज ही रखा गया है. माना जा रहा है कि कैबिनेट की मंजूरी के बाद इससे औपचारिकताओं को जल्द पूरा कर लिया जाएगा. प्रयाग, इलाहाबाद का पवित्र स्थान हैं, जहां पर गंगा, यमुना और सरस्वती एक साथ बहती हैं. इसके अलावा यहां पर हर 12 साल पर कुंभ मेला लगता है. इतिहासकारों के मुताबिक प्रयाग, इलाहाबाद का पुराना नाम था जिसे 1575 में मुगल शासक अकबर ने बदल दिया था.

उत्तर प्रदेश में जिलों का नाम बदलने का काम पिछली सरकारें भी कर चुकी हैं. बसपा प्रमुख मायावती ने मुख्यमंत्री रहते हुए 11 जिलों के नाम दलित विभूतियों के नाम पर रख दिए थे. लेकिन बाद में आई सपा सरकार ने इनमें से आठ शहरों को उनके पुराने नाम वापस लौटा दिए थे. बीते दिनों केंद्र सरकार ने मुगलसराय स्टेशन का नाम दीन दयाल उपाध्याय के नाम पर रख दिया था. इसके अलावा दिल्ली की रेस कोर्स का नाम भी लोक कल्याण मार्ग कर दिया था.