अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग उन के साथ 12 जून को होने वाली बैठक रद्द कर दी है. किम जोंग उन को भेजी गई एक चिट्ठी में डोनाल्ड ट्रंप ने इसकी वजह उत्तर कोरिया के हालिया बयानों को बताया है. ट्रंप ने पत्र में कहा, ‘मैंने यह फ़ैसला उत्तर कोरिया के हाल में आए गुस्से और दुश्मनी से भरे बयान को देखते हुए लिया है. मैं आपसे मिलने का बेसब्री से इंतज़ार कर रहा था. लेकिन आपके बयान में ज़ाहिर हुई शत्रुता को देखते हुए मुझे लगता है कि इस वक़्त यह मुलाकात उचित नहीं है.’

डोनाल्ड ट्रंप ने किम जोंग को चेतावनी देते हुए कहा है, ‘आप अपनी परमाणु क्षमता की बात करते हैं, लेकिन हमारी क्षमता इतनी शक्तिशाली है कि मैं ईश्वर से यही प्रार्थना करता हूं कि उसे कभी इस्तेमाल करने का अवसर न आए.’

अमेरिकी राष्ट्रपति का ये भी कहना था कि उत्तर कोरिया के पास एक मौका था जो उसने खो दिया. हालांकि अमेरिकी राष्ट्रपति ने भविष्य में कभी न कभी किम जोंग उन से मिलने की उम्मीद जताई है.

ट्रंप ने 12 जून को होने वाली शांति वार्ता उत्तर कोरिया के उस बयान के बाद रद्द की है जिसमें उसने अमेरिका को सीधी चेतावनी दी थी. गुरूवार को उत्तर कोरिया की उपविदेश मंत्री चोई सोन-हुई ने कहा था, ‘यह फैसला अमेरिका को करना है कि वह हमसे बैठक के कमरे में मिलना चाहता है या परमाणु युद्ध में.’

उत्तर कोरिया की ओर से यह धमकी अमेरिकी उपराष्ट्रपति माइक पेंस के एक बयान पर नाराजगी जताते हुए आई थी. सोमवार को फॉक्स न्यूज के साथ बातचीत में माइक पेंस ने कहा था, ‘राष्ट्रपति स्पष्ट कर चुके हैं कि अगर किम जोंग-उन कोई समझौता नहीं करते हैं तो इस विवाद का अंत भी लीबिया मॉडल की तरह होगा.’ यह पूछे जाने पर कि क्या यह उत्तर कोरिया को धमकी है, माइक पेंस ने कहा था, ‘यह काफी हद तक सच्चाई है.’ 2003 में लीबिया के शासक मुअम्मर गद्दाफी ने प्रतिबंध हटाने के बदले अपना परमाणु हथियार कार्यक्रम बंद कर दिया था.