दक्षिण अफ्रीका के क्रिकेटर और सर्वकालिक सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाज़ों में से एक एबी डिविलियर्स ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास ले लिया है. उन्होंने ऐसे समय में संन्यास लिया जब वे अच्छा खेल रहे थे और क्रिकेट प्रशंसकों को उनके ऐसे किसी फ़ैसले की कल्पना तक नहीं थी. उनके प्रशंसक इस फ़ैसले को लेकर इसलिए भी हैरान हैं कि अगले विश्व कप में केवल एक साल का समय बचा है और डिविलियर्स अभी 34 साल के ही हैं. हालांकि कइयों का यह भी मानना है कि किसी खिलाड़ी को ऐसे समय में खेल को अलविदा कहना चाहिए जब लोग उससे और खेलने की उम्मीद कर रहे हों, न कि तब जब लोग कहने लगें कि यह संन्यास कब लेगा.

एबी डिविलियर्स को लोग ‘मिस्टर 360’ भी कहते हैं. इसकी वजह है मैदान के हर कोने में शॉट मारने की उनकी हैरतअंगेज़ प्रतिभा. टी20 क्रिकेट में उन्होंने ऐसे शॉट लगाए जो उनसे पहले किसी बल्लेबाज़ नहीं लगाए थे. आईपीएल मैचों के शायद वे एकमात्र विदेशी बल्लेबाज़ रहे हैं जिनके नाम की गूंज हर भारतीय मैदान के चारों तरफ़ सुनाई देती थी.

एबी डिविलियर्स के संन्यास लेने से कुछ दिन पहले से एक संदेश सोशल मीडिया पर वायरल हो गया था. उनके संन्यास लेने के बाद यह काफ़ी तेज़ी से शेयर किया जा रहा है. इस संदेश में डिविलियर्स को मैदान के बाहर भी ‘मिस्टर 360’ बताया जा रहा है. यानी एक ऐसा व्यक्ति जो खेल के ही नहीं ज़िंदगी के हर फ़ॉर्मेट में सुपरहिट है. संदेश में क्या है, यह आप नीचे पढ़ सकते हैं.

एबी डिविलियर्स. क्या आप उन्हें जानते हैं? मेरे ख़्याल से आप उन्हें एक क्रिकेटर के रूप में जानते हैं जो दक्षिण अफ़्रीका और आईपीएल की रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर टीम के लिए खेलता है. अब उनके बारे में कुछ और बातें भी जानिए.

1. वे (दक्षिण अफ़्रीका की) जूनियर नेशनल हॉकी टीम के गोलकीपर भी रहे हैं.

2. वे जूनियर नेशनल फ़ुटबॉल टीम के लिए चुने गए थे.

3. वे दक्षिण अफ़्रीका की जूनियर रग्बी टीम के भी कप्तान रहे.

4. राष्ट्रीय स्कूल तैराकी प्रतियोगिताओं में वे छह रिकॉर्ड बना चुके हैं.

5. वे दक्षिण अफ़्रीकी जूनियर एथलेटिक्स में 100 मीटर की रेस सबसे कम समय में पूरी करने का रिकॉर्ड बना चुके हैं.

6. वे दक्षिण अफ़्रीका की जूनियर डेविस कप टेनिस टीम के सदस्य भी रहे.

7. वे अंडर-19 राष्ट्रीय बैडमिंटन चैंपियन भी बने.

8. उन्होंने अंडर-19 गोल्फ़ टूर्नामेंट भी जीता.

9. वे ग़रीब बच्चों और केपटाउन स्थित कैंसर अस्पताल के संस्थापक सदस्य हैं और दान भी करते हैं.

10. उन्होंने जिंबाब्वे के सुनसान इलाक़े के एक पूरे गांव को गोद लिया हुआ है. उसके विकास के लिए फ़ंड भी इकट्ठा करते हैं.

अब आप सोच रहे होंगे कि फिर तो पढाई में जीरो होगा. तो इसका जवाब यह है : उन्हें एक बायोकैम साइंस प्रोजेक्ट के लिए दिवंगत नेल्सन मंडेला से राष्ट्रीय पदक भी मिल चुका है. 

उनके नाम पर 31 गेंदों पर 100 और 16 गेंदों में 50 रन बनाने का रिकॉर्ड है. किसी भी इंसान के लिए ये कमाल की उपलब्धियां हैं. एक बात और, एबी डिविलियर्स दो भाषाओं में पॉप म्यूजिक भी रिकॉर्ड कर चुके हैं. फिर भी कुछ लोग यह शिकायत करते रहते हैं कि मैं अकेला क्या-क्या करूं? हम सबको उनसे सीखना चाहिए. ख़ास तौर पर उन्हें जो हमेशा बहाने बनाते रहते हैं.

इस मैसेज में एबी डिविलियर्स के बारे में जो कुछ भी बताया गया है वह कितना सही है, यह जानने से पहले एक सवाल मन में आता है कि जिन लोगों ने इस मेसेज पर यक़ीन किया होगा उनमें से कितने शर्म से पानी-पानी हुए होंगे. इसे पढ़कर लगता है कि डिविलियर्स मानवीय सीमाओं के पार की क्षमता वाले कोई दिव्य पुरुष हैं जो जीवन में कभी असफल नहीं हुए.

भारत में खेलों के मामले में केवल पूर्व क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर को भगवान का दर्जा प्राप्त है. उनके दौर में लगता था कि उनके जैसा बल्लेबाज़ी रिकॉर्ड अब किसी का नहीं होगा. लेकिन फिर विराट कोहली ने रनों और शतकों की ऐसी झड़ी लगाई कि अब सचिन का रिकॉर्ड भी टूटने की बातें होने लगी हैं. शायद वह दिन दूर नहीं जब उन्हें क्रिकेट का दूसरा भगवान कहा जाने लगे. वायरल मैसेज में एबी डिविलियर्स में जितनी प्रतिभाएं बताई गई हैं उन्हें जानने के बाद समझ नहीं आता कि उनकी तुलना किससे की जाए.

इंडिया टुडे
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हालांकि इसकी कोई ज़रूरत नहीं है क्योंकि मैसेज में जो कुछ भी बताया गया है उसे ख़ुद डिविलियर्स ने अपनी आत्मकथा में बड़ी ईमानदारी से झूठी और भ्रामक बताया है. किताब में उन्होंने लिखा है कि क्रिकेट के मैदान के बाहर उनके बारे में जो कुछ भी कहा गया है उसमें अधिकतर बातें झूठी हैं. मिसाल के लिए उनका दक्षिण अफ़्रीका की नेशनल हॉकी और फ़ुटबॉल टीम के लिए चुना जाना. किताब में उन्होंने लिखा है, ‘हम स्कूल के दिनों में छुट्टियों के समय फ़ुटबॉल खेला करते थे. यह बस हमारा रूटीन बन गया था. इससे ज़्यादा कुछ नहीं था.’

डिविलियर्स ने बताया कि उन्होंने अपनी ज़िंदगी में कभी रग्बी नहीं खेला. लिहाज़ा जूनियर नेशनल रग्बी टीम का कप्तान बनने की बात ही बेतुकी लगती है. उन्होंने राष्ट्रीय स्कूल तैराकी प्रतियोगिता में छह रिकॉर्ड बनाए यह भी बेकार की बात है. हां, छोटी उम्र में उन्होंने अपने प्राइमरी स्कूल की ब्रेस्टस्ट्रोक प्रतियोगिता में रिकॉर्ड ज़रूर बनाया था, लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर कोई स्विमिंग रिकॉर्ड उनके नाम नहीं है. किताब में डिविलियर्स ने अंडर-19 बैडमिंटन चैंपियन होने की बात को भी ख़ारिज किया है. उन्होंने बड़ी ईमानदारी के साथ लिखा है, ‘जहां तक मुझे याद है. मैंने अपनी पूरी ज़िंदगी में सिर्फ़ एक बार बैडमिंटन का मैच खेला है. मार्क बाउचर (पूर्व दक्षिण अफ़्रीकी क्रिकेटर) के साथ. वह भी केवल हंसी-मज़ाक़ में.’

एबी डिविलियर्स को दक्षिण अफ़्रीका के पूर्व राष्ट्रपति दिवंगत नेल्सन मंडेला से कभी कोई पदक नहीं मिला. क्योंकि उन्होंने कभी किसी साइंस प्रोजेक्ट पर काम नहीं किया. हालांकि वे मंडेला से दो बार मिले ज़रूर थे. इसके अलावा डिविलियर्स ने इस दावे को भी नकारा है कि वे अपने देश की जूनियर टेनिस डेविस कप टीम के सदस्य रहे थे. इस नाम की कोई टीम दक्षिण अफ़्रीका में नहीं है. हालांकि उन्होंने आत्मकथा में यह ज़रूर बताया कि टेनिस उन्हें काफ़ी पसंद है और वे अक्सर यह खेल खेलते हैं.

वायरल मैसेज में एबी डिविलियर्स के बारे में जितनी भी बातें बताई गई हैं उनमें उनके व्यक्तित्व से जुड़ी एक चीज़ छूट गई है. वह यह कि एबी डिविलियर्स एक ईमानदार व्यक्ति हैं. वे झूठ नहीं बोलते और उनके बारे में बढ़ा-चढ़ाकर बताई गई बातों को उन्होंने अपनी आत्मकथा के ज़रिये ख़ारिज किया है. आम तौर किसी क्षेत्र का कोई महान व्यक्ति अपनी आत्मकथा में इस तरह की साफ़गोई नहीं दिखाता. यह निःसंदेह ऐसी विशेषता है जो मौजूदा दौर में दुर्लभ है.