येद्दियुरप्पा जी, आपने विश्वासमत का सामना किए बिना ही कर्नाटक के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा क्यों दे दिया था?

क्योंकि जिन घोड़ों पर बैठकर मैं दौड़ने की सोच रहा था, उनकी पहले ही फिक्सिंग हो चुकी थी!

लेकिन आपको तो भरोसा था कि आप विधानसभा में शक्ति प्रदर्शन में जीत जाएंगे. फिर आपकी सरकार बहुमत साबित क्यों नहीं कर सकी?

देखिए, ढाई दिन विधायकों की किडनैपिंग के लिये बहुत होंगे, हॉर्स ट्रेडिंग के लिये नहीं!...ये बात राज्यपाल भी समझते हैं, पता नहीं सुप्रीम कोर्ट ने कैसे नहीं समझी! इतने कम समय में तो सांसदों को सिर्फ किडनैप... मेरा मतलब कि बंदी ही बनाया जा सकता है! अंअ...मेरा कहने का अर्थ सिर्फ इतना है कि हमारे लोगों को कांग्रेस ने ऐन मौके पर होटल में बंधक बना लिया, इस कारण हम बहुमत साबित नहीं कर सके.

लेकिन भाजपा अध्यक्ष अमित शाह जी का तो कहना है कि कांग्रेस ने अपने विधायकों को बंदी बनाया था. फिर आप उन्हें भाजपा के विधायक क्यों बता रहे हैं?

रेस के घोड़े किसी के नहीं होते...इसलिए सबके होते हैं. जिन्हें बंदी बनाया गया था, वे थे जरूर कांग्रेस के घोड़े, लेकिन दौड़ते हमारे लिये... मेरा मतलब है कि कांग्रेस विधायकों का वैचारिक समर्थन हमें मिलने की पूरी संभावना थी, लेकिन कांग्रेस ने हमें उनसे न ‘मन की बात’ करने का मौका दिया, न ही धन की बात!

भाजपा के कई नेताओं के साथ-साथ आप पर भी हॉर्स ट्रेडिंग के आरोप लगे हैं. इनमें कितनी सच्चाई है?

मुझे समझ नहीं आ रहा कि हॉर्स ट्रेडिंग में आरोप-प्रत्यारोप की क्या बात है! देश में सारे जानवरों की खरीद-फरोख्त की अनुमति है, फिर सिर्फ घोड़ों की खरीदारी पर ही इतना विवाद क्यों?

येद्दियुरप्पा जी, मेरे कहने का मतलब था कि कर्नाटक में भाजपा पर विधायकों को खरीदने की कोशिश के आरोप लगे हैं. इस बारे में आपका क्या कहना है?

सबसे अच्छे और बड़े खरीदार होने का तमगा लेकर भी हम किसी को खरीद न सके, इससे ज्यादा दुखद और अफसोसजनक भला और क्या होगा! अब्ब्ब...मेरा कहने का मतलब है कि ये आरोप पूरी तरह बेबुनियाद हैं. जो लोग हम पर विधायकों की खरीदारी का आरोप लगा रहे हैं, वे खुद राजनीति में विधायकों के अपहरण की परंपरा की बुनियाद रख चुके हैं!

बहुमत के इतने करीब होकर भी कर्नाटक में आपकी सरकार नहीं बन सकी. इससे आपने क्या सीखा?

मुझे अब जाकर समझ आया कि सफलता के लिये तन, मन और धन के संयुक्त प्रयास की बात क्यों की जाती है. हम लोग सिर्फ ‘मन और धन की बात’ में ही अटके रह गए और तन को भूल गए. कांग्रेस ने सिर्फ ‘तन की बात’ के दम पर ही खेल बदल दिया. हमने एक दूसरी बात यह भी सीखी कि हमेशा पैसा फेंककर ही सबसे बढ़िया शो नहीं देखा जा सकता... कभी-कभी किडनैपिंग जैसी चीजों में भी मुफ्त का शानदार मनोरंजन हो सकता है!

आप तीन बार कर्नाटक के मुख्यमंत्री बने, लेकिन तीनों ही बार अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर सके. क्या आपको बुरा नहीं लग रहा कि बार-बार कुर्सी हाथ में आकर चली जा रही है?

(थोड़ा खीजते हुए) चार दिन की जिंदगी में तीन बार पूर्व मुख्यमंत्री का तमगा मिलना क्या कम है!

क्या आपको नहीं लगता कि विश्वासमत हासिल न कर पाने के बाद अब आपका राजनीतिक करियर तकरीबन खत्म हो चुका है?

मैं कोई रेस का घोड़ा नहीं हूं जो बूढ़ा होकर दौड़ नहीं सकता!

कर्नाटक में चुनाव प्रचार के दौरान अमित शाह ने गलती से कह दिया था, ‘भ्रष्टाचार के लिए यदि स्पर्धा कराई जाए तो येद्दियुरप्पा सरकार को सबसे भ्रष्ट सरकार होने का अवॉर्ड जरूर मिलेगा...इस घटना पर आपका क्या कहना है?

जबान फिसलने की समस्या तो इस ‘टू मैन आर्मी’ में सबसे ज्यादा है. पर दिक्कत की बात ये है कि उन्हें लगता है कि उनकी गलती के लिए भी माफी अरविंद केजरीवाल को ही मांग लेनी चाहिए!

येद्दियुरप्पा जी, इस बात में कितनी सच्चाई है कि चुनाव प्रचार के दौरान आपने एक दलित के घर में जो भोजन किया था, वो किसी होटल से बुलवाया गया था?

(खीजते हुए) क्यों, क्या होटल का खाना मेरे लिये अछूत है!...आखिर होटल का खाना होटल में बैठकर तो नहीं खाया न, खाया तो दलित के घर पर ही! आप लोगों के लिए होटल का खाना ज्यादा महत्वपूर्ण है या छुआछूत खत्म करना? वैसे भी जिस बेचारे के पास खुद के खाने के लिए कुछ न हो, क्या मैं उस पर अपने खाने का भी भार डाल देता? असल में आप लोगों के लिए होटल का खाना और छोले भटूरे से लेकर ब्रेड पकौड़े तक खाने की हर चीज एक बड़ा मुद्दा है, छुआछूत नहीं! आप लोगों को राजनीति की खबरों में नहीं फूड इंडस्टी में जाना चाहिए.

आपके राजनीतिक जीवन की सबसे बड़ी त्रासदी क्या है?

(दुखी आवाज में) मैंने लोगों को कुर्सी को लात मारते सुना था, पर यहां तो कुर्सी ही मुझे लात मार रही है! तीन बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेकर भी मैं कोई कार्यकाल पूरा नहीं कर सका, किसी नेता के लिए इससे बड़ी राजनीतिक त्रासदी भला क्या हो सकती है!