मलेशिया एयरलाइंस के विमान एमएच-370 को लापता हुए चार साल से ज़्यादा बीत चुके हैं. इस विमान के लापता होने के बाद करीब तीन साल इसके मलबे को ढूंढा गया. विमान में सवार लोगों के शवों का पता लगाने की कोशिश की गई. लेकिन कुछ हाथ नहीं लगा. थक हारकर जनवरी 2017 में तलाशी अभियान अधिकृत रूप से बंद कर दिया गया. लेकिन अब ख़बर आई है कि जांचकर्ताओं को इस हादसे के कुछ कारणों का ज़रूर पता चला है. यानी वे विमान लापता होने की गुत्थी सुलझाने के क़रीब पहुंच गए हैं.

बिज़नेस इनसाइडर के मुताबिक ऑस्ट्रेलियाई टेलीविज़न के ‘60 मिनट ’ कार्यक्रम के विशेष संस्करण के दौरान हवाई हादसों के शीर्ष जांचकर्ताओं ने एमएच-370 के लापता होने से जुड़े कुछ अहम पहलुओं का ख़ुलासा किया है. इनमें से कई जांचकर्ताओं ने माना है कि यह असल में कोई हादसा नहीं था बल्कि पायलट कैप्टन ज़ाहरी अहमद शाह ने योजनाबद्ध तरीके से इस सामूहिक नरसंहार को अंज़ाम दिया था. इसमें उसने ख़ुद अपनी जान भी दांव पर लगाई.

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ग़ौरतलब है कि एमएच-370 हादसे को दुनिया की सबसे बड़ी हवाई दुर्घटनाओं में शुमार किया जाता है. मलेशियाई एयरलाइंस का यह विमान आठ मार्च 2014 को 239 लोगों को लेकर कुआलालंपुर से बीजिंग के लिए निकला था. लेकिन रास्ते में जब वह हिंद महासागर के ऊपर उड़ान भर रहा था ताे अचानक रडार की पकड़ से बाहर हो गया. इसके बाद विमान का किसी को कुछ पता नहीं चला.

इस बारे में वरिष्ठ जांचकर्ता लैरी वैन्स कहते हैं, ‘वह (पायलट) अपने आप को मार रहा था और बदक़िस्मती से विमान में सवार हर व्यक्ति को भी. उसने यह जानबूझकर किया. उसने ऑक्सीजन मास्क पहना और विमान के भीतर ऑक्सीजन का दबाव धीरे-धीरे कम कर दिया. इससे विमान में सवार सभी लोग अचेत हो गए. इसीलिए जब विमान गोता खाने लगा तो कहीं से कोई प्रतिरोध नहीं हुआ.’

बोइंग-777 के वरिष्ठ पायलट रहे सिमॉन हार्डी भी कहते हैं, ‘जब विमान पूरी तरह 180 डिग्री पर घूमा तो वह मलेशिया और थाइलैंड की सीमा के ऊपर उड़ रहा था. यहां पायलट कुछ देर दोनों देशों के हवाई क्षेत्र में अंदर-बाहर होता रहा. जिससे उसका अंदाज़ा न लगाया जा सके. उसने पेनांग (मलेशिया का प्रांत) में अपने गृहनगर को आख़िरी बार देखने के लिए विमान को कुछ नीचे की ओर से झुकाया भी था. इससे भी साबित होता है कि उसने यह सब जानबूझकर और सोची-समझी रणनीति के तहत किया था.’