परमाणु आपूर्तकर्ता समूह (एनएसजी) की सदस्यता हासिल करने की भारत की कोशिशें काफी समय से असफल हो रही हैं. इसके बावज़ूद केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने उम्मीद नहीं छोड़ी है. सूत्रों की मानें तो मोदी सरकार इस दिशा में फिर एक बड़ी कोशिश करने जा रही है. इसके तहत मोदी सरकार का लक्ष्य है कि 2019 से पहले भारत को एनएसजी की सदस्यता मिल जाए.

मोदी सरकार की ऐसी कोशिशों से जुड़े तीन वरिष्ठ सूत्रों ने नाम न छापने की शर्त पर हिंदुस्तान टाइम्स से बातचीत में इसकी पुष्टि की है. ये तीनों ही लोग इस दिशा में किए जा रहे राजनयिक प्रयासों में भागीदार हैं. उनके मुताबिक इस साल जून और फिर दिसंबर में एनएसजी की बैठक होने जा रही है. कोशिश है कि इसी समयावधि के भीतर भारत को एनएसजी का सदस्य बनाने के मसले पर संगठन के सभी सदस्यों के बीच आम सहमति बना ली जाए. ऐसा होने पर 2019 के चुनाव से पहले यह मोदी सरकार की बड़ी उपलब्धि होगी.

यहां याद दिलाना ज़रूरी है कि पिछले साल जून में सियोल में हुई एनएसजी की बैठक के दौरान भी भारत को संगठन की सदस्यता दिलाए जाने के प्रस्ताव पर चर्चा हुई थी. लेकिन तब चीन ने इस आधार पर प्रस्ताव का विरोध किया था कि भारत ने अब तक परमाणु अप्रसार संधि (एनपीटी) पर दस्तख़त नहीं किए हैं. इसलिए उसे सदस्यता नहीं दी जा सकती. और अगर एनपीटी पर दस्तख़त किए बिना ही भारत को सदस्यता दी जाती है तो पाकिस्तान को भी मिलनी चाहिए. इसके बाद भारत की सदस्यता का मामला ठंडे बस्ते में चला गया था.

हालांकि इसी समय के आसपास भारत को तीन अन्य संगठनों की सदस्यता मिल गई. ये हैं- मिसाइल टेक्नोलॉजी कंट्रोल रिज़ीम (जून-2016 में सदस्यता मिली), वासेनार अरेंजमेंट (दिसंबर-2017 में भारत सदस्य बना) और ऑस्ट्रेलिया ग्रुप (जनवरी-2018 में भारत को सदस्यता दी गई). परमाणु, मिसाइल, जैविक और रासायनिक हथियारों की तकनीक और प्रसार पर वैश्विक नियंत्रण रखने वाले इन संगठनों की सदस्यता मिलने के बाद अब एनएसजी में भारत की दावेदारी पिछली बार से इस दफा कहीं ज़्यादा मज़बूत मानी जा रही है.