घाटे से जूझ रही सरकारी विमानन कंपनी एयर इंडिया को उबारने की सरकार की कोशिश मुश्किल में पड़ती दिखाई दे रही है. सरकार ने इसी साल मार्च में कंपनी की 76 फीसदी हिस्सेदारी बेचने का फैसला किया था, लेकिन समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक एयर इंडिया में निवेश के लिए अब तक उसे किसी कंपनी से कोई निविदा (बोली) नहीं मिली है. बुधवार को यह जानकारी देते हुए विमानन सचिव आरएन चौबे ने बताया है कि एयर इंडिया में निवेश की बोली प्रक्रिया कल यानी 31 मई को खत्म हो रही है.

एयर इंडिया में निवेश के लिए बोली लगाने की आखिरी तारीख पहले 14 मई तय की गई थी. लेकिन तब सरकार को कोई निवेशक न मिलने से आखिरी तारीख बढ़ाकर 31 मई कर दी गई थी. इससे पहले एयर इंडिया में निवेश के लिए जेट एयरवेज और इंडिगो एयरलाइंस जैसी देसी विमानन कंपनियों ने इच्छा जताई थी. हालांकि निवेश संबंधी तय की गई कड़ी शर्तों को देखते हुए बाद में दोनों कंपनियों ने इससे किनारा कर लिया था.

इस बीच टाटा ने भी एयर इंडिया की हिस्सेदारी खरीदने में दिलचस्पी दिखाई थी, लेकिन बाद में वह भी पीछे हट गई. इसके बाद सरकार को ब्रिटिश एयरवेज, लुफ्तहांसा, सिंगापुर एयरलाइंस और खाड़ी देश की एक अन्य विमानन कंपनी से निवेश की आस थी, लेकिन अब यह लगभग तय माना जा रहा है कि इन कंपनियों में से भी कोई एयर इंडिया में निवेश के लिए आगे नहीं आने वाला.

बताया जाता है कि इन विमानन कंपनियों का इरादा बदलने के पीछे एयर इंडिया में निवेश के लिए रखी गई एक कड़ी शर्त भी है. इसके मुताबिक निवेश करने वाली कंपनी को एयर इंडिया पर चढ़े कुल 48700 करोड़ रुपये के कर्ज में से 33390 करोड़ रुपये का कर्ज चुकाना होगा. हालांकि विमानन मामलों के जानकारों का कहना है कि एयर इंडिया की संपत्तियों को परखा जाए तो कर्ज की यह रकम मामूली है.