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पर्यटकों के बीच अपनी सुंदरता और भौगोलिक विशिष्टता के लिए मशहूर अमेरिका का हवाई द्वीप बीते एक महीने से एक नई वजह से चर्चा में है. यह वजह है यहां ‘किलवेया ज्वालामुखी’ का फिर से सक्रिय हो जाना. किलवेया दुनिया के सबसे सक्रिय ज्वालामुखियों में से एक है. इसे देखने के लिए हर साल करीब एक करोड़ पर्यटक हवाई आते हैं. दरअसल हवाई द्वीप ऐसे ज्वालामुखियों से निकले लावे से ही बना है. जब भी समुद्र के बीच स्थित टेक्टोनिक प्लेट्स की दरारों से लावा निकलता है और सतह पर आकर जम जाता है तो इस तरह के द्वीप बनते हैं. फिलहाल, हवाई के बारे में कहा जा सकता है कि जिस लावा ने इसे जैव विविधिता और प्राकृतिक सुंदरता दी है, वही आज यहां के लोगों और वनस्पतियों के विनाश का कारण बनता हुआ दिख रहा है.

अमेरिका के जियोग्राफिकल सर्वे ने आशंका जाहिर की है कि किलवेया ज्वालामुखी में कभी भी बड़ा विस्फोट हो सकता है जिससे हवाई का पर्यावरणीय संतुलन बिगड़ सकता है. किलवेया के भयावह स्वरूप को इसी से जाना जा सकता है कि फिलहाल इससे निकलने वाला धुआं बारह सौ फीट की ऊंचाई तक जा रहा है और इसे कई किलोमीटर दूर से भी देखा जा सकता है. किलवेया ज्वालामुखी से निकलने वाला लावा देखकर ऐसा लगता है जैसे कोई बहुत बड़ा और खूबसूरत लेजर-वॉटर शो चल रहा हो. लेकिन असल में ये बहती हुई चट्टानें हैं जो देखने में जितनी सुंदर हैं, उससे हजार गुना खतरनाक भी हैं. इसका तापमान करीब दो हजार डिग्री सेल्सियस है, इसलिए पेड़-पौधे हों या घर-बार जो भी इसके संपर्क में आता है, राख में बदल जाता है. इस ज्वालामुखी के सक्रिय होने से हवाई के पर्यटन क्षेत्र को तो नुकसान हुआ ही है, यहां रहने वाले हज़ारों लोगों को भी अपना घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर जाना पड़ा है.

इस समय यहां बहती हुई चट्टानों और समुद्र की लहरों के मिलने का दृश्य भी आपको बहुत लुभाता है. लेकिन पर्यारणविदों की मानें तो जब गरम लावा समुद्र के पानी के संपर्क में आता है तो कई जहरीली गैसें बनती है और इन गैसों के चलते हवाई पर अब एसिड रेन का भी खतरा मंडरा रहा है.