उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने राजनीतिक दलों से एक-दूसरे के साथ दुश्मन की तरह नहीं बल्कि प्रतिस्पर्धियों जैसा व्यवहार करने की अपील की है. उन्होंने कहा, ‘अलग-अलग राजनीतिक दल के नेताओं के एक-दूसरे के सामने बैठने से उनके विचारों में बदलाव नहीं आ जाता. हर राजनीतिक दल की अपनी अलग विचारधारा है और सभी दल अपनी तरह से देश के विकास में अपना सर्वश्रेष्ठ योगदान देने की कोशिश करते हैं.’ द टाइम्स आॅफ इंडिया के मुताबिक वैंकया नायडू ने यह बात बुधवार को कांग्रेसी नेता अभिषेक मनु सिंघवी की किताब ‘स्ट्रेट टॉक’ के विमोचन के मौके पर कही.

वेंकैया नायडू के इस बयान को पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी द्वारा राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) के एक कार्यक्रम में शामिल होने की सहमति दिए जाने पर उठे विवाद से जोड़कर भी देखा जा रहा है. अगले महीने की सात तारीख को प्रणब मुखर्जी आरएसएस के नागपुर मुख्यालय में एक कार्यक्रम में शामिल होंगे जहां वे संघ प्रचारकों को संबोधित भी करेंगे. हालांकि कांग्रेस पार्टी के कई नेता चाहते हैं कि पूर्व राष्ट्रपति इस कार्यक्रम में शामिल न हों. इसके लिए पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेसी नेता सीके जाफर शरीफ ने प्रणब मुखर्जी को एक पत्र भी लिखा है.

उधर किताब के विमोचन कार्यक्रम के दौरान वेंकैया नायडू ने राज्यसभा के कुछ सदस्यों द्वारा सदन की कार्यवाही में बाधा पहुंचाने का मुद्दा भी उठाया. उन्होंने कहा, ‘अभिषेक मनु सिंघवी ने भी अपनी इस किताब में इस समस्या का जिक्र करते हुए ऐसे सदस्यों के स्वत: निलंबन की बात कही है. राज्यसभा की कार्यवाही सुचारु रूप से चले इसके लिए एक समिति बनाई गई है जिसकी रिपोर्ट अगले महीने तक आ जाएगी. मुझे उम्मीद है कि यह समिति कांग्रेस नेता की किताब में दिए सुझाव पर भी विचार करेगी.’