यूक्रेन का एंटी-करप्शन ब्यूरो (एनएबी) अपने यहां एक सैन्य समझौते में कथित रूप से रिश्वत लिए जाने की जांच कर रहा है. द इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक यह मामला सैन्य परिवहन विमान एन-32 के कलपुर्जों की खरीद से जुड़ा है. एनएबी को शक है कि भारत के रक्षा मंत्रालय के कुछ अधिकारियों ने कलपुर्जों की खरीद के इस सौदे में 17.55 करोड़ रुपये की रिश्वत ली है. एनएबी ने इस मामले की जांच के लिए अंतरराष्ट्रीय कानूनी सहायता के रूप में भारत के गृह मंत्रालय से मदद मांगी है. यूक्रेन की राजधानी कीएव स्थित भारतीय राजदूत के जरिये एनएबी ने गृह मंत्रालय से कहा है कि वह रक्षा मंत्रालय के उन अधिकारियों की पहचान बताए जो विमान की डील कराने में शामिल थे.

खबर के मुताबिक 26 नवंबर, 2014 को यूक्रेन की एक सरकारी कंपनी (स्पेटस्टेक्नोएक्सपोर्ट) ने रक्षा मंत्रालय (वायु सेना मुख्यालय) के साथ हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड के साथ एक सौदे से जुड़े समझौते पर हस्ताक्षर किए थे. यह सौदा पुर्जों की आपूर्ति के लिए किया गया था. इसके कुछ समय बाद कंपनी ने ग्लोबल मार्केटिंग एसपी लिमिटेड नाम की एक और कंपनी से सौदा किया था. यूएई में रजिस्टर्ड इस कंपनी का मकसद इस सौदे को अमल में लाना था. अखबार के मुताबिक स्पेटस्टेक्नोएक्सपोर्ट ने ग्लोबल मार्केटिंग के दुबई स्थित खाते में 17.55 करोड़ रुपये ट्रांसफर भी कर दिए.

अब यूक्रेनी अधिकारियों का कहना है कि दोनों देशों की कंपनियों के बीच हुए इस सौदे को अमल में लाने के लिए इस तीसरी कंपनी की कोई जरूरत ही नहीं थी. एनएबी को शक है कि भारत के रक्षा अधिकारियों को उन परिस्थितियों की जानकारी हो सकती है जिनकी वजह से स्पेटस्टेक्नोएक्सपोर्ट ने ग्लोबल मार्केटिंग के साथ 13 अगस्त, 2015 को दूसरा समझौता किया था.

उधर, रक्षा मंत्रालय से सहयोग मांगने के अलावा एनएबी ने इस सिलसिले में दुबई के नूर इस्लामिक बैंक से भी जानकारी मांगी है. ग्लोबल मार्केटिंग का खाता इसी बैंक में है. जांच एजेंसी ने अगस्त 2015 से लेकर जनवरी 2018 के बीच इसमें हुए लेन-देन का ब्योरा मांगा है. वहीं, अखबार ने इस मामले में एनएबी के अधिकारी से अलग-अलग दिन संपर्क करने की कोशिश की लेकिन बात नहीं सकी. उसके मुताबिक भारत के रक्षा मंत्रालय से बातचीत की कोशिश भी नाकाम रही.