यूक्रेन से सैन्य परिवहन विमान एएन-32 के कलपुर्जों की खरीद से जुड़े सौदे में कथित रिश्वतखोरी को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है. इस मुद्दे पर गुरुवार को कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा. ट्विटर पर उन्होंने लिखा, ‘मिनिस्ट्री ऑफ डिफेंस, इंडिया (मोदी) के अधिकारियों पर यूक्रेन सरकार से वाया दुबई लाखों डॉलर की रिश्वत लेने का आरोप है. मोदी जी, हमारे स्वघोषित चौकीदार के रूप में आपसे मेरा अनुरोध है कि आप अपने भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई करें.’

गुरुवार को इंडियन एक्सप्रेस में प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक यूक्रेन के एंटी-करप्शन ब्यूरो ने इस समझौते में भारत के रक्षा मंत्रालय के कुछ अधिकारियों द्वारा 17.55 करोड़ रुपये की रिश्वत लेने का शक जताया है. यूक्रेन की सरकारी कंपनी स्पेक्ट्सटेक्नोएक्सपोर्ट और भारत के रक्षा मंत्रालय (वायु सेना मुख्यालय) के बीच यह समझौता 26 नवंबर, 2014 को हुआ था.

इस बीच कांग्रेस प्रवक्ता और पूर्व केंद्रीय मंत्री मनीष तिवारी ने भी मोदी सरकार से कई सवालों का जवाब मांगा है. उन्होंने पूछा, ‘क्या यह सच है कि यूक्रेन के एंटी-करप्शन ब्यूरो ने फरवरी 2018 में ही भारत सरकार से कानूनी मदद मांगी थी?’ मनीष तिवारी ने आगे पूछा कि यूक्रेन की ओर से मांगी गई मदद पर गृह मंत्रालय और रक्षा मंत्रालय ने क्या कदम उठाए हैं और क्या इस मामले में आंतरिक स्तर पर भी कोई जांच शुरू की गई है. कांग्रेस नेता का यह भी कहना था कि अगर मौजूदा मोदी सरकार पारदर्शिता में भरोसा करती है और ‘न खाऊंगा न खाने दूंगा’ नारे को मानती है तो वह जनता से तथ्यों को छिपा क्यों रही है.