कर्नाटक में कांग्रेस के दिग्गज नेता डीके शिवकुमार से जुड़े लोगों के ठिकानों पर गुरुवार देर शाम केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने छापे मारे हैं. इन लोगों पर बंद हो चुके 1,000-500 के नोटों के ज़रिए अवैध लेन-देन करने का आरोप है.

ख़बरों के मुताबिक सीबीआई ने बेंगलुरु, कनकपुरा और रामनगर में शिवकुमार के सहयाेगियों के ठिकानों पर छापा मारा. जिनके ख़िलाफ़ यह कार्रवाई की गई उनके नाम शिवनंद, नंनजप्पा और पद्मनाभैया बताए जाते हैं. सीबीआई का आरोप है कि कॉरपोरेशन बैंक के मुख्य प्रबंधक बी प्रकाश ने ‘अज्ञात लोगों’ (शिवकुमार के सहयोगी) के साथ मिलकर लगभग 10 लाख रुपए के पुराने नोटों को अवैध रूप से नए नोटों में बदला. यह मामला 14 नवंबर 2016 का है. यानी आठ नवंबर को 1,000-500 के नोट बंद होने के क़रीब एक सप्ताह बाद. प्रकाश पर यह भी आरोप है कि उन्होंने इस मामले को अपने स्तर पर ही रफ़ा-दफ़ा करने की भी कोशिश की थी.

हालांकि सीबीआई की इस कार्रवाई को शिवकुमार ने ‘बदले की राजनीति’ बताया है. शिवकुमार और उनके भाई कांग्रेस सांसद डीके सुरेश ने गुरुवार देर रात मीडिया से बातचीत में कहा, ‘भारतीय जनता पार्टी का केंद्रीय नेतृत्व मुझे और मेरे भाई को अपने साथ लाने के लिए डरा-धमका रहा है. लेकिन हम ऐसी धमकियों से डरने वाले नहीं हैं.’ उन्होंने कहा कि वे इस कार्रवाई के ख़िलाफ़ अदालत में याचिका लगाएंगे. उन्होंने केंद्रीय एजेंसियों को भी नसीहत दी कि वे ‘वे किसी के हाथ की कठपुतली न बनें. अपनी गरिमा क़ायम रखें.’

ग़ौरतलब है कि इससे पहले बीते साल अगस्त में आयकर विभाग ने भी शिवकुमार के ठिकानों पर छापे मारे थे. माना जा रहा है कि उस कार्रवाई में विभाग को 300 करोड़ रुपए से ज़्यादा के काले धन का पता चला था. यहां यह भी बताना ज़रूरी है कि शिवकुमार ही वे नेता हैं जिनकी वज़ह से कर्नाटक विधानसभा चुनाव के बाद भाजपा 104 विधायकों के साथ सबसे बड़ा दल होने के बावज़ूद सरकार नहीं बना पाई. वहीं जनता दल-धर्मनिरपेक्ष ने तीसरे नंबर पर रहकर भी दूसरे नंबर वाली कांग्रेस के समर्थन से सरकार बना ली.